Customs Duty: भारत में आयात-निर्यात करने वाले व्यवसायों के लिए सीमा शुल्क यानी कस्टम्स ड्यूटी हमेशा से एक जटिल चुनौती रही है। अलग-अलग स्लैब, उलझाऊ वर्गीकरण और अंतहीन विवादों ने इस पूरी व्यवस्था को एक पहेली बना रखा था। लेकिन अब Union Budget 2026 में इस तस्वीर के बदलने के पूरे संकेत मिल रहे हैं।
# Union Budget 2026: सरल होगी Customs Duty, जानिए व्यापार पर इसका असर
## कस्टम्स ड्यूटी सुधार: क्या बदलेगा व्यापार का तरीका?
1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण Union Budget 2026 पेश करेंगी और इसमें कस्टम्स ड्यूटी की संरचना को आसान बनाने का एक बड़ा ऐलान होने की उम्मीद है। वर्तमान में भारत में कस्टम्स ड्यूटी के 8 से अधिक स्लैब हैं, जिनमें IGST और सेस जैसे अतिरिक्त शुल्क भी शामिल हैं। सरकार की योजना है कि इन स्लैबों को घटाकर केवल 5 या 6 किया जाए, ताकि नियमों का पालन करना आसान हो और भ्रम की स्थिति कम हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इसका सबसे बड़ा फायदा विवादों और अदालती मामलों में कमी के रूप में देखा जाएगा। दिसंबर 2024 तक, 75,000 से अधिक कस्टम्स से संबंधित मामले लंबित थे, जिनमें लगभग ₹24,000 करोड़ फंसा हुआ था। शुल्क संरचना में सरलता आने से इन मामलों में कमी आएगी और कंपनियों का समय व पैसा बचेगा। Union Budget 2026 में SEZ (विशेष आर्थिक क्षेत्र) और घरेलू टैरिफ क्षेत्र (Domestic Tariff Area) के बीच शुल्क संरचना को भी तर्कसंगत बनाने पर विचार हो सकता है।
सरकार की मंशा अनावश्यक छूटों को हटाने, उलटी शुल्क संरचना (inverted duty structure) को ठीक करने, पेपरलेस कस्टम्स प्रक्रिया और एमनेस्टी स्कीम जैसे सुधारों पर भी ध्यान केंद्रित करने की है। यदि ये बदलाव लागू होते हैं, तो इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन (EVs), फार्मास्युटिकल्स, वस्त्र, रत्न और आभूषण, नवीकरणीय ऊर्जा और MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। यह पहल ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देगी और देश में निवेश को आकर्षित करेगी।
## व्यापार जगत की प्रतिक्रिया और भविष्य की संभावनाएं
व्यापार और उद्योग जगत इन संभावित सुधारों पर उत्सुकता से नजर रख रहा है। कस्टम्स प्रक्रिया के सरल होने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आ सकती है और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इससे निर्यातकों को भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें कम कागजी कार्रवाई और स्पष्ट शुल्क नियमों का सामना करना पड़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/। कुल मिलाकर, सरकार कस्टम्स प्रणाली को सरल, पारदर्शी और व्यवसाय-अनुकूल बनाना चाहती है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिल सके। यह कदम व्यापार में सुगमता लाने और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण साबित होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







