GDP Growth: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आने वाले वित्तीय वर्ष उत्साहजनक संकेत दे रहे हैं। जहां पिछले साल थोड़ी नरमी देखी गई, वहीं अब चालू वित्त वर्ष में तेज रफ्तार की उम्मीद है, जो देश के आर्थिक भविष्य को नई दिशा दे सकती है।
# भारत की GDP Growth: कब तक होगी 7.4% की रफ्तार!
## देश की GDP Growth को मिलेगी गति: सरकार और रेटिंग एजेंसियों का अनुमान
भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय विकास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। सरकार के नवीनतम अनुमानों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज 6.5 प्रतिशत से एक उल्लेखनीय उछाल है। इस तेज रफ्तार के पीछे मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों में सुधार और सरकार द्वारा दिए जा रहे नीतिगत समर्थन को प्रमुख कारक माना जा रहा है। ये सभी मिलकर आर्थिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं, जिससे यह वृद्धि संभव हो सकेगी।
इस बीच, प्रमुख साख निर्धारण एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने भी भारत के आर्थिक भविष्य पर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है। एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-27 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इंडिया रेटिंग्स का मानना है कि जीएसटी और इनकम टैक्स में कटौती जैसे संरचनात्मक सुधारों के साथ-साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते आर्थिक गतिविधियों को और मजबूती देंगे। यह भी उम्मीद जताई गई है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अस्थिरता के संभावित नकारात्मक प्रभावों से काफी हद तक सुरक्षित रहेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने इस बात पर जोर दिया कि अगले वित्तीय वर्ष में उच्च वृद्धि दर के साथ कम मुद्रास्फीति का माहौल बना रह सकता है, जिसकी औसत खुदरा मुद्रास्फीति दर 3.8% रहने का अनुमान है। यह स्थिर मूल्य वृद्धि विकास को और अधिक टिकाऊ बनाने में मदद करेगी। उन्होंने आगे बताया कि कम शुल्क वाला भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश की जीडीपी वृद्धि को अतिरिक्त समर्थन प्रदान कर सकता है। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष में आधार वर्ष 2011-12 के हिसाब से जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत और बाजार मूल्य पर जीडीपी 9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय रुपये के औसतन 92.26 प्रति डॉलर पर रहने की संभावना जताई गई है, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में यह 88.64 प्रति डॉलर था। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें।
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इंडिया रेटिंग्स का विश्लेषण यह भी बताता है कि न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और ओमान जैसे देशों के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) न केवल विदेशी निवेश को आकर्षित करेंगे, बल्कि चालू खाता घाटे (CAD) को भी नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ये समझौते वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत करेंगे और वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत करेंगे और आर्थिक विकास के नए रास्ते खोलेंगे। एजेंसी के अनुसार, 1 फरवरी को पेश होने वाले 2026-27 के केंद्रीय बजट में कई अहम घोषणाएं होने की उम्मीद है, जिसमें सीमा शुल्क युक्तिकरण और “विकसित भारत-राम-जी अधिनियम” के तहत आवंटन शामिल हो सकते हैं। इसी दिन 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट भी जारी होने की संभावना है, जो राज्यों के बीच राजस्व बंटवारे और वित्तीय प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रदान करेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कर राजस्व के मोर्चे पर, इंडिया रेटिंग्स ने अनुमान लगाया है कि चालू वित्त वर्ष में लगभग दो लाख करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। इस कमी की भरपाई गैर-कर राजस्व और पूंजीगत व्यय में सीमित कटौती के माध्यम से की जा सकती है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत, यानी 15.69 लाख करोड़ रुपये के बजट लक्ष्य के भीतर ही रहने की उम्मीद है, जो सरकार के वित्तीय अनुशासन को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि चुनौतियों के बावजूद, सरकार अपनी वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







