Silver Prices: गुरुवार को कीमती धातुओं के बाजार में हड़कंप मच गया जब चांदी की कीमतों में अप्रत्याशित रूप से भारी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार के दौरान चांदी ने प्रति किलोग्राम 10,000 रुपये का गोता लगाया, जिससे निवेशक सकते में आ गए। 5 मार्च, 2026 को डिलीवरी होने वाली चांदी 2,50,605 रुपये प्रति किलोग्राम के अपने पिछले स्तर से गिरकर 2,40,605 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। दिसंबर में 83.60 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद यह गिरावट आई है, जिसने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। क्या चांदी की कीमतें अभी और गिरेंगी, स्थिर होंगी या एक बार फिर अपनी चमक बिखेरेंगी? यह सवाल इस समय हर निवेशक के मन में है।
चांदी की कीमत में भारी गिरावट: क्या निवेश का यह सही समय है, जानें Silver Prices का भविष्य
Silver Prices: क्या यह गिरावट जारी रहेगी या बढ़ेगी मांग?
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, एचएसबीसी ने चांदी के लिए अपने आउटलुक को अपडेट किया है, जिसमें आने वाले वर्षों में कीमतों में क्रमिक गिरावट का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, बैंक ने साल 2026 के लिए औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 68.25 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। एचएसबीसी का मानना है कि 2027 में चांदी की कीमतें गिरकर 57.00 डॉलर और 2029 तक 47.00 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच जाएंगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बैंक ने इस गिरावट के पीछे की वजहों को स्पष्ट करते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में चांदी की मांग में कमी आई है और साथ ही, आभूषण खरीदने वाले भी बढ़ी हुई कीमतों के कारण बड़े पैमाने पर पीछे हट रहे हैं। बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में चांदी की मांग में 230 मिलियन औंस की भारी कमी देखी गई। यह कमी 2026 में घटकर 140 मिलियन औंस और 2027 में मात्र 59 मिलियन औंस रहने का अनुमान है, जो कीमती धातु के भविष्य पर सवालिया निशान लगाता है।
चांदी की कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारण
चांदी की कीमतों में इस अचानक और बड़ी गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक काम कर रहे हैं। इन कारणों को समझना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है ताकि वे सही निर्णय ले सकें।
- मुनाफावसूली: दिसंबर 2025 में चांदी अपने अब तक के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। ऐसे में, उच्च कीमतों का लाभ उठाने के लिए निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली की जा रही है, जिससे बाजार में बिक्री का दबाव बढ़ा और कीमतों में गिरावट आई।
- कमजोर मांग: साल 2025 में, चाहे वह सोलर पैनल के लिए हो, इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के लिए हो या विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के लिए, चांदी की औद्योगिक मांग लगभग 1.2 अरब औंस तक पहुंच गई थी। हालांकि, इस साल सोलर क्षमता बढ़ाने की रफ्तार धीमी होने और वैश्विक विनिर्माण वृद्धि के कमजोर पड़ने से चांदी की औद्योगिक मांग में कमी आने की उम्मीद है।
- डॉलर की मजबूती: कीमती धातुओं का अमेरिकी डॉलर के साथ विपरीत संबंध होता है। जब डॉलर इंडेक्स मजबूत होता है, तो सोने और चांदी जैसी गैर-रिटर्न देने वाली धातुओं पर दबाव बनता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि विदेशी खरीदारों के लिए ये धातुएं महंगी हो जाती हैं, जिससे उनकी खरीदारी क्षमता प्रभावित होती है।
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विशेषज्ञों की राय और भविष्य की राह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट बाजार की अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का परिणाम है। दीर्घकालिक निवेशक अभी भी चांदी को एक महत्वपूर्ण निवेश विकल्प मानते हैं, लेकिन अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। औद्योगिक मांग में कमी और मजबूत डॉलर की स्थिति निकट भविष्य में कीमतों पर दबाव बनाए रख सकती है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव या अप्रत्याशित आर्थिक झटके की स्थिति में चांदी एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में फिर से निवेशकों को आकर्षित कर सकती है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार के रुझानों का बारीकी से विश्लेषण करें और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







