US Tariffs: वैश्विक व्यापार परिदृश्य में एक बड़े भूचाल की आहट सुनाई दे रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, वेनेजुएला पर शिकंजा कसने के बाद, अब भारत और चीन जैसे बड़े आर्थिक शक्ति वाले देशों पर अपनी नजर गड़ाए हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका का सख्त रुख दुनिया के एनर्जी सेक्टर में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है। ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट ऑफ 2025’ नामक इस नए बिल के जरिए ट्रंप प्रशासन ने ऐसे देशों पर 500% तक भारी-भरकम टैरिफ लगाने की तैयारी कर ली है, जो रूस से सस्ते तेल की खरीद जारी रखे हुए हैं, जिससे उनकी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर सीधा असर पड़ सकता है।
रूस से तेल खरीद पर US Tariffs का खतरा: भारत के लिए आर्थिक चुनौती!
क्या हैं नए US Tariffs और इसका उद्देश्य?
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बताया कि इस नए बिल के माध्यम से राष्ट्रपति को उन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार मिलेगा जो रूस से सस्ते क्रूड ऑयल की खरीद कर यूक्रेन में युद्ध जारी रखने में उसकी मदद कर रहे हैं। इस कदम का सीधा लक्ष्य रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाना है ताकि वे अपना आयात बंद कर दें। ये देश केवल तेल ही नहीं, बल्कि यूरेनियम का भी आयात रूस से करते हैं। 7 जनवरी, 2026 को हुए इस ऐलान को ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापार नीति और यूक्रेन में युद्ध विराम लागू करने की उनकी कोशिशों के रूप में देखा जा रहा है। ग्राहम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह बिल चीन, भारत और ब्राजील जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव बनाने का मौका देगा, क्योंकि रूस से सस्ते में तेल खरीदकर ये देश कहीं न कहीं यूक्रेन में जंग जारी रखने में रूस की मदद कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक स्थिरता पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रही है। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों पर निर्भर हैं, यह एक गंभीर चुनौती पैदा कर सकता है। मौजूदा समय में भारत पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लगा हुआ है। यदि ट्रंप प्रशासन 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का फैसला करता है, तो यह भारत सहित कई देशों के लिए आर्थिक रूप से विनाशकारी साबित होगा। यह दुनिया की कुछ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर पूरी तरह से व्यापार प्रतिबंध लगाने जैसा हो सकता है।
भारत का रुख और ऊर्जा सुरक्षा की प्राथमिकता
भारत ने अमेरिकी के इस दबाव को अनुचित और गैर-वाजिब बताया है। भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता अपनी 1.4 अरब की आबादी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह तर्क दिया गया है कि भारत अपने लोगों की बढ़ती ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से तेल खरीदता है। 2025 के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि भारत ने पहले से ही रूस से क्रूड ऑयल खरीदना कम कर दिया है। रिलायंस इंडस्ट्री्स और अन्य सरकारी रिफाइनरियों ने रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी कंपनियों से तेल की खरीद में कमी की है। इसी बीच, भारत ने अमेरिका से रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें क्रूड ऑयल की खरीद को लगभग 11 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, जो उसकी व्यापारिक रणनीतियों में विविधता लाने के प्रयासों को दर्शाता है। यह एक संतुलनकारी कार्य है जहाँ भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और भू-राजनीतिक दबावों के बीच रास्ता खोजने की कोशिश कर रहा है।
यह स्थिति भारत के लिए कूटनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर एक बड़ी चुनौती पेश करती है। एक ओर, उसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी ओर, उसे अमेरिका जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदार के साथ अपने संबंधों को भी साधकर रखना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। भविष्य में भारत की रणनीति कैसी होगी, यह देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि इस निर्णय का दूरगामी परिणाम वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।







