Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। यह पवित्र तिथि हर माह दो बार आती है, एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। साधक इस दिन अन्न का त्याग कर भगवान नारायण की आराधना करते हैं, जिससे मोक्ष और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
फरवरी 2026 में कब है विजया और आमलकी एकादशी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि – Ekadashi 2026
Ekadashi 2026: विजया एकादशी का महत्व और पूजन विधि
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से सभी कार्यों में विजय प्राप्त होती है। यह व्रत शत्रुओं पर विजय दिलाता है और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन भक्त भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी आराधना करते हैं, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
विजया एकादशी पूजा विधि
- दशमी तिथि की संध्या से ही सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं, फिर चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
- तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
- विजया एकादशी व्रत कथा का पाठ करें या श्रवण करें।
- भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
- रात में जागरण कर भगवान का ध्यान करें।
- अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।
विजया एकादशी शुभ मुहूर्त
| तिथि | दिन | आरंभ समय | समापन समय |
|---|---|---|---|
| विजया एकादशी व्रत | शुक्रवार | 13 फरवरी 2026, सुबह 05:48 | 14 फरवरी 2026, सुबह 03:22 |
| पारण का समय | शनिवार | 14 फरवरी 2026, सुबह 07:05 से 09:20 |
आमलकी एकादशी: पुण्य और पूजा विधि
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा तीनों देवों का वास होता है। आमलकी एकादशी व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और समस्त पापों का नाश होता है। यह दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा और यज्ञ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आमलकी एकादशी पूजा विधि
- एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिवत पूजा करें।
- आंवले के पेड़ के नीचे जाकर उसकी पूजा करें। पेड़ को जल अर्पित करें, रोली, चंदन, फूल, धूप, दीप से पूजा करें।
- आंवले के पेड़ की परिक्रमा करें और मौली बांधें।
- आंवले का भोग लगाएं और इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
- आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
- भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
आमलकी एकादशी शुभ मुहूर्त
| तिथि | दिन | आरंभ समय | समापन समय |
|---|---|---|---|
| आमलकी एकादशी व्रत | मंगलवार | 23 फरवरी 2026, रात 08:35 | 24 फरवरी 2026, शाम 06:17 |
| पारण का समय | बुधवार | 25 फरवरी 2026, सुबह 07:04 से 09:19 |
भगवान विष्णु के मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥
फरवरी 2026 में आने वाली ये दोनों एकादशियां भक्तों के लिए विशेष पुण्य कमाने का अवसर लेकर आएंगी। विजया एकादशी जहाँ विजय और सफलता का वरदान देती है, वहीं आमलकी एकादशी मोक्ष और पापों से मुक्ति दिलाती है। इन पवित्र तिथियों पर श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एकादशी के दिन दान-पुण्य करना, खासकर अन्नदान करना, अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही, इस दिन तुलसी माता की पूजा करना और सायंकाल में तुलसी के नीचे दीपक जलाना भी बहुत फलदायी होता है।
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