Haritalika Teej: इस साल पटना सहित पूरे बिहार में हरितालिका तीज का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर यह महत्वपूर्ण व्रत रखा जाएगा। इसके ठीक अगले दिन से 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होगी, जिसकी तैयारियां अभी से जोर-शोर से चल रही हैं।
हरितालिका तीज: शुभ मुहूर्त और व्रत का महत्व
पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:15 बजे शुरू होकर 14 सितंबर को सुबह 7:29 बजे तक रहेगी। उदयकाल व्यापिनी तिथि के सिद्धांत के आधार पर, यह पर्व 14 सितंबर को ही मनाया जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, जिसमें वे अन्न और जल का त्याग करती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से यह व्रत करती हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित डॉ. राघव नाथ झा के अनुसार, हरितालिका तीज का संबंध देवी पार्वती की कठोर तपस्या से है, जिन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए यह व्रत रखा था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सखियों द्वारा देवी पार्वती को अगवा कर एकांत स्थान पर ले जाने के कारण ही इस व्रत का नाम ‘हरितालिका’ पड़ा।
14 सितंबर को प्रदोष काल में महिलाएं उमा-महेश्वर और भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित कर षोडशोपचार पूजा करेंगी। इस दौरान तीज व्रत की कथा सुनी जाएगी, भजन-कीर्तन होगा और जागरण भी किया जाएगा। व्रत का पारण 15 सितंबर की सुबह किया जाएगा।
पंडित राकेश झा ने बताया कि इस दिन भगवान शिव की पार्थिव (मिट्टी से बनी) प्रतिमा की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा में गंगाजल, अक्षत, चंदन, बेलपत्र, मौसमी फल और अन्य पकवान चढ़ाए जाते हैं।
गणेश उत्सव: दस दिवसीय महापर्व का आरंभ
हरितालिका तीज के ठीक अगले दिन, 15 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के साथ गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन से 10 दिवसीय गणेश उत्सव का शुभारंभ होगा, जो अनंत चतुर्दशी यानी 25 सितंबर तक चलेगा।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, गणेश उत्सव की शुरुआत विशाखा नक्षत्र और ऐन्द्र योग में होगी, जबकि पूजन तुला लग्न में आरंभ होगा। इस दौरान भक्त भगवान गणेश की मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित कर मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना करेंगे।
भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा का विधान है। यह पर्व घर-घर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
ये दोनों पर्व बिहार के सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का अभिन्न अंग हैं। आने वाले दिनों में इन त्योहारों को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिलेगा, जिससे बाजारों में भी रौनक बढ़ने की उम्मीद है।







