Bihar Flood: राजधानी पटना से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सुकुलपुर पंचायत में बिहार बाढ़ ने भयावह रूप ले लिया है। यहां कई घरों में बाढ़ का पानी घुसने से ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि जिन घरों में आठ-आठ कमरे हैं, उन्हीं घरों के लोग बच्चों और महिलाओं के साथ अपनी छत पर रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले चार-पांच दिनों से पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। घरों के निचले कमरों में पानी भर चुका है, जिससे बाहर निकलना और घर के अंदर रहना दोनों ही मुश्किल हो गया है। कई परिवारों ने अपनी छत पर त्रिपाल लगाकर किसी तरह अस्थायी ठिकाना बना लिया है।
8 कमरों के घर में पानी, छत पर कट रही जिंदगी
गांव के लोग बताते हैं कि उनके घर के नीचे आठ कमरे हैं, लेकिन ये सभी कमरे पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। ऐसे में परिवार के सदस्यों को छत पर ही शरण लेनी पड़ी है। छोटे बच्चों के साथ छत पर रात गुजारना उनकी मजबूरी बन गई है।
एक महिला ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा, ‘बाहर जाने की सुविधा नहीं है और घर के अंदर भी रहना संभव नहीं है। घर में जितना राशन बचा है, उससे पूरा महीना गुजारना मुश्किल है। पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।’
बाढ़ के कारण इंसानों के साथ-साथ मवेशियों की भी परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीण अपने जानवरों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। चारों ओर पानी ही पानी होने के कारण लोगों को नाव के सहारे आवाजाही करनी पड़ रही है। फिलहाल इलाके में एक ही नाव उपलब्ध कराई गई है, जिससे जरूरी आवाजाही हो पा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, कई पंचायतों और गांवों में बड़ी संख्या में घर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
सांप-बिच्छू का खतरा और रात भर जागते लोग
पानी भरने के साथ-साथ घरों में सांप और बिच्छू घुसने का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय यह डर और भी ज्यादा सताता है। नीचे पानी भरे होने के कारण पूरा परिवार छत पर ही रहने को मजबूर है।
एक ग्रामीण ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ‘छत पर बच्चों के साथ रहना आसान नहीं है। सांप या बिच्छू आने का डर हमेशा बना रहता है।’ इस स्थिति में परिवार के लोगों की चिंताएं कई गुना बढ़ गई हैं।
बाढ़ प्रभावित एक परिवार में कुछ दिन पहले एक व्यक्ति की मौत भी हुई है। इसके बावजूद, परिवार के लोगों को अंतिम संस्कार और पूजा-पाठ से जुड़े सामान की व्यवस्था करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घर में पानी भरा होने के कारण खाना बनाने से लेकर अन्य सभी जरूरी काम छत पर ही करने पड़ रहे हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद न मिलने पर आक्रोश
बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों में स्थानीय स्तर पर राहत न पहुंचने को लेकर गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों की ओर से उन्हें पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है। वे लगातार परेशानी झेल रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंच रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि भोजन, पीने का पानी, नाव और रहने की सुरक्षित जगह जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर गंभीर संकट है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री, पर्याप्त नाव और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, इलाके में 1000 से अधिक घर बाढ़ से प्रभावित हैं। यदि पानी इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। पटना से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर बाढ़ की यह तस्वीर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलों को सामने ला रही है।







