Shattila Ekadashi: माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली षटतिला एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और तिल के छह प्रकार से उपयोग के कारण इसका विशेष महत्व है। इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की आराधना करने से दरिद्रता दूर होती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
षटतिला एकादशी 2026: जानिए व्रत विधि, शुभ मुहूर्त और तिल दान का महत्व
माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में, यह पावन तिथि गुरुवार, 22 जनवरी को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और तिल के विभिन्न प्रकार के उपयोग से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन तिल का दान करने से समस्त पापों का शमन होता है और व्यक्ति स्वर्ग लोक में स्थान पाता है।
Shattila Ekadashi 2026: तिल के छह प्रयोगों का महत्व
षटतिला एकादशी का नाम ‘षट्’ (छह) और ‘तिला’ (तिल) से बना है, जिसका अर्थ है तिल के छह प्रकार के प्रयोग। इन छह प्रयोगों के माध्यम से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है।
ये छह प्रयोग इस प्रकार हैं:
- तिल मिश्रित जल से स्नान
- तिल का उबटन लगाना
- तिल का हवन करना
- तिल मिश्रित जल का सेवन करना
- तिल का दान करना
- तिल से बने व्यंजनों का सेवन करना
षटतिला एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में षटतिला एकादशी का व्रत इस प्रकार रहेगा:
| विवरण | समय |
|---|---|
| एकादशी तिथि प्रारंभ | बुधवार, 21 जनवरी 2026, शाम 07:11 बजे |
| एकादशी तिथि समाप्त | गुरुवार, 22 जनवरी 2026, शाम 05:44 बजे |
| व्रत पारण का समय | शुक्रवार, 23 जनवरी 2026, सुबह 07:14 बजे से सुबह 10:25 बजे तक |
षटतिला एकादशी व्रत की पूजा विधि
षटतिला एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने पर ही पूर्ण फल प्राप्त होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। व्रत की विधि निम्नलिखित है:
- एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। स्नान के जल में थोड़ा तिल मिलाकर स्नान करें।
- भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- विष्णु जी को पीले वस्त्र, पुष्प, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य (तिल मिश्रित खीर या अन्य तिल के व्यंजन) अर्पित करें।
- तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं, क्योंकि यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
- पूरे दिन निराहार रहकर व्रत करें। यदि संभव न हो तो फलाहार कर सकते हैं।
- रात्रि में भगवान विष्णु के नाम का जागरण करें, भजन-कीर्तन करें।
- अगले दिन यानी द्वादशी को व्रत का पारण शुभ मुहूर्त में करें। पारण से पूर्व किसी ब्राह्मण या गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं और तिल का दान अवश्य करें।
षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों में षटतिला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन तिल के छह प्रकार के उपयोग से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति समस्त पापों से मुक्ति पाकर मोक्ष को प्राप्त करता है। यह एकादशी दरिद्रता का नाश कर धन-धान्य में वृद्धि करती है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मणी ने भगवान विष्णु के कहने पर इस व्रत को विधिवत किया, जिसके परिणामस्वरूप उसे स्वर्ग में सभी प्रकार के सुख प्राप्त हुए।
भगवान विष्णु का मंत्र
षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु के इस मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
निष्कर्ष और उपाय
षटतिला एकादशी का व्रत हमें तिल के महत्व को समझाता है और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करने का अवसर देता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करने और तिल का उपयोग करने से व्यक्ति को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। जीवन में सुख-शांति और समृद्धि के लिए इस पावन व्रत का पालन अवश्य करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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