दरभंगा, देशज टाइम्स। पसीने की स्याही से जो लिखते हैं इरादें को, उसके मुक्कद्दर के सफ़ेद पन्ने कभी कोरे नही होते युद्ध का परिणाम मैं क्या जानता हूं मैं सिपाही युद्ध करना जानता हूँ; रख दिया जो पैर वह आगे बढ़ेगा, उच्चतम प्रालेय शिखरों पर चढ़ेगा। मृत्यु की होगी वहाँ ललकार, है स्वीकार मुझको मृत्यु से भी प्यार। जीत हो या हो भले ही हार-। जीत हो या हो भले ही हार कर न तू इसकी तनिक परवाह।जिंदगी का संघर्ष आपको जीने की ताकत देगा।
मुख में मुस्कान बिखेरेगा। जीवन की संतुष्टि के लिए मेहनत और संघर्ष सबसे आवश्यक होते हैं। आप कुछ भी कर लें, बिना संघर्ष के आपके जीवन की नैय्या को किनारा नहीं मिलने वाला। जब जीवन का सबसे मूल्यवान सच संघर्ष ही है तो हममें से हर किसी को इससे बचने की कोशिश नहीं करना चाहिए। पसीने की स्याही से जो लिखते हैं इरादें को, उसके मुक्कद्दर के सफ़ेद पन्ने कभी कोरे नही होते।
डर मुझे भी लगा फासला देख कर, पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर, खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई, मेरी मंजिल मेरा हौंसला देख कर। जीत हो या हो भले ही हार, है स्वीकार जीवन की मुझे ललकार। जल रहा प्रत्येक क्षण हो रवि प्रलय का चल रहा हो पवन सन्-सन्-सन् प्रलय का; चाँद से भी अग्नि की लपटें उठी हों उच्च हिमगिरि की शिलायें जल उठी हों। फूल धरती के बने अंगार, है स्वीकार।








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