Jamui Online Gaming: जमुई जिले में ऑनलाइन गेमिंग का खतरनाक चेहरा सामने आया है, जहां दो नाबालिग भाइयों को ‘रोबॉक्स’ जैसे लोकप्रिय खेल के जरिए संदिग्ध गतिविधियों में धकेला जा रहा था। एक विदेशी हैंडलर ने इन बच्चों को सरकारी वेबसाइट्स हैक करने का टास्क दिया था, जिससे बड़ा साइबर खतरा टल गया। जमुई पुलिस और जिला सूचना इकाई (डीआईयू) की सतर्कता से इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो बच्चों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

आदर्श थाना पुलिस ने दोनों नाबालिगों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की। इस संवेदनशील मामले में सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं और विदेशी हैंडलर के पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगालने में जुटी हुई हैं।
ऑनलाइन गेम ‘रोबॉक्स’ से शुरू हुई खतरनाक दोस्ती
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिला सूचना इकाई को अपनी नियमित डिजिटल निगरानी के दौरान एक अहम इनपुट मिला। इसमें जमुई क्षेत्र के दो नाबालिगों के टेलीग्राम पर सक्रिय ‘साइबर जिहाद मूवमेंट’ नामक ग्रुप से जुड़े होने की बात सामने आई। तकनीकी सत्यापन के बाद आदर्श थाना पुलिस ने दोनों किशोरों को अपनी अभिरक्षा में लिया और उनके मोबाइल की जांच की।
प्रारंभिक जांच में उनके मोबाइल में टेलीग्राम ऐप और रोबॉक्स गेम सक्रिय मिले। इसके साथ ही, संबंधित ग्रुप में अरबी भाषा में लिखी गई कई आपत्तिजनक सामग्रियां और संदिग्ध चैट्स भी पाई गईं। पुलिस ने सभी संदिग्ध चैट्स, मैसेज और स्क्रीनशॉट्स को डिजिटल साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कर लिया है।
‘साइबर जिहाद मूवमेंट’ ग्रुप में हैकिंग और हमले की बातें
पूछताछ के दौरान दोनों नाबालिग भाइयों ने बताया कि रोबॉक्स गेम खेलते समय ही उनकी बातचीत एक विदेशी हैंडलर से शुरू हुई थी। शुरुआत में वह हैंडलर गेम के अंदर छोटे-मोटे टास्क देता था। विश्वास जीतने के बाद, उसने दोनों को एक टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ दिया, जिसका नाम ‘साइबर जिहाद मूवमेंट’ था।
इस ग्रुप में उन्हें सरकारी वेबसाइटों के वेब लिंक भेजकर उन्हें हैक करने के निर्देश दिए जाते थे। चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि ग्रुप के भीतर भारतीय सेना और पुलिस बल पर हमले से जुड़ी चर्चाएं भी होती थीं।
मोबाइल फोरेंसिक जांच से खुलेगी विदेशी हैंडलर की पोल
मामले की गंभीरता को देखते हुए आदर्श थाने में संबंधित कानूनी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने दोनों नाबालिगों के मोबाइल फोन जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं। इस जांच से डिलीट किए गए डेटा, आईपी एड्रेस और विदेशी हैंडलर के मुख्य सर्वर का सटीक लोकेशन ट्रेस करने में मदद मिलेगी। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इस नेटवर्क ने जिले या राज्य के अन्य कितने बच्चों को अपने चंगुल में फंसाया है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोनों आरोपी विधि विवादित किशोर (नाबालिग) हैं, इसलिए उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी गई है और पूरी कानूनी प्रक्रिया किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत की जा रही है।
पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर पैनी नजर रखें। किसी भी संदिग्ध चैट या गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस को दें, ताकि ऐसे राष्ट्रविरोधी तत्वों के मंसूबे कामयाब न हों और मासूम बच्चे उनके जाल में फंसने से बच सकें। इस मामले की गहन जांच से विदेशी हैंडलर के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की उम्मीद है।







