Bihar MLC: बिहार विधान परिषद में नए सदस्यों के शपथ ग्रहण की तैयारियां तेज हो गई हैं। 18 नवंबर को आठ नवनिर्वाचित विधान पार्षद पद और गोपनीयता की शपथ ले सकते हैं, जिसके लिए राज्यपाल को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। इस बीच, दो निर्दलीय एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज की सदस्यता पर मंडरा रहा खतरा दल-बदल कानून की तकनीकी पेचीदगियों के चलते फिलहाल टल गया है। बिहार विधान परिषद में 16 नवंबर को पुराने सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिसके बाद नए चेहरों का सदन में प्रवेश होगा।

दो निर्दलीय MLC की सदस्यता पर क्यों उठा था सवाल, अब कैसे बची?
तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय जीते बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विजयी हुए राहुल राज की विधान परिषद सदस्यता खत्म करने की मांग उठी थी। आरोप था कि दोनों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और जन सुराज पार्टी ने विधान परिषद के कार्यकारी सभापति रामवचन राय को एक मांगपत्र सौंपा था, जिसमें दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की अपील की गई थी। उनका तर्क था कि निर्दलीय रहते हुए किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेने पर उनकी विधान पार्षदी समाप्त होनी चाहिए।
हालांकि, इस मांग के सामने एक बड़ी तकनीकी अड़चन आ गई। विधान परिषद के सूत्रों के अनुसार, दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई केवल उसी व्यक्ति पर हो सकती है, जो सदन का सदस्य बन चुका हो। इसके लिए शपथ लेना अनिवार्य है। राहुल राज पहली बार चुनाव जीतकर विधान परिषद पहुंचे हैं और उन्होंने अभी तक शपथ नहीं ली है, इसलिए तकनीकी रूप से वे फिलहाल सदन के सदस्य नहीं माने जाते। उनकी सीट पर 16 नवंबर तक अफाक अहमद ही विधान पार्षद हैं। ऐसे में जब तक अफाक अहमद सदस्य हैं, राहुल राज के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।
वहीं, बंशीधर ब्रजवासी का मौजूदा कार्यकाल भी 16 नवंबर को ही समाप्त हो रहा है। उनके खिलाफ सदस्य के तौर पर केवल इसी कार्यकाल में कोई कार्रवाई संभव थी। कार्यकाल खत्म होने के बाद यह कार्रवाई अपने आप समाप्त हो जाएगी, जिससे दोनों नेताओं को फिलहाल राहत मिल गई है।
विधान परिषद से कौन से पुराने चेहरे हुए बाहर, कौन नए आएंगे?
इस बार के चुनाव में शिक्षक कोटे की चारों सीटों पर नए सदस्य जीतकर आए हैं, जिससे सदन में कई पुराने और दिग्गज चेहरे नजर नहीं आएंगे। बीजेपी के नवल किशोर यादव, जो पिछले 30 वर्षों से विधान परिषद के सदस्य रहे हैं, अब सदन में नहीं दिखेंगे। कांग्रेस के मदन मोहन झा को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। तिरहुत शिक्षक सीट से सीपीआई के संजय सिंह और सारण शिक्षक सीट से जन सुराज पार्टी के अफाक अहमद भी चुनाव हार गए हैं।
इनकी जगह अब आरजेडी के संजीव कुमार, बीजेपी के नरेंद्र प्रसाद सिंह, जन सुराज पार्टी के सुरेश प्रसाद राय और निर्दलीय राहुल राज विधान परिषद में शपथ लेंगे। स्नातक कोटे की सीटों से तीन पुराने सदस्य अपनी जगह बरकरार रखने में सफल रहे हैं, जिनमें निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी, बीजेपी के एनके यादव और जदयू के नीरज कुमार शामिल हैं। दरभंगा स्नातक सीट से आरजेडी के अनिल झा पहली बार विधान परिषद के सदस्य बनकर सदन में एक नए चेहरे के रूप में नजर आएंगे। इस तरह, आठ सीटों पर हुए चुनाव के बाद विधान परिषद में चार नए शिक्षक प्रतिनिधि और स्नातक कोटे से एक नया सदस्य पहुंचेगा, जबकि तीन पुराने सदस्य अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे हैं।
आगे क्या?
विधान परिषद सचिवालय ने राज्यपाल की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा है। मंजूरी मिलते ही 18 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस नए बदलाव के साथ बिहार विधान परिषद में नई राजनीतिक समीकरण और बहस देखने को मिलेगी, खासकर उन सीटों पर जहां नए और युवा चेहरे चुनकर आए हैं।







