मनोज कुमार झा, Darbhanga News: देखें VIDEO | 40 साल का नलकूप, खेतों में आज तक नहीं पहुंचा सका 1 बूंद पानी, खर्च होते रहे लाखों, देखें VIDEO |
चालीस साल बीत गए। खेतों में एक बूंद पानी नहीं टपका। यह हाल है, अलीनगर उद्धवह सिंचाई योजना का। इसके तहत लगाई गई नलकूप चालीस साल बाद भी आज तक किसानों की खेत में एक (The tube well installed in Darbhanga forty years ago could not provide even a drop of water) बूंद भी पानी नहीं पहुंचा सका।

लेकिन, उसकी मरमती के नाम पर लाखों रुपए विभाग ने खर्च कर दिए। यह हकीकत है। मगर, सरकार और प्रशासन के मुंह मोड़ने वाले हालात पर। जहां, किसान बेबस हैं। सिस्टम मालामाल है।
यह नलकूप वर्ष 1984-85 में लगाया गया
प्रखंड के नावानगर एवं तुलापटी गांव के बीच से होकर बहने वाली कमला नदी के पश्चिमी तटबंध पर यह नलकूप वर्ष 1984-85 में लगाया गया। लेकिन, उसे चालू नहीं किया गया। इस कारण किसानों के खेत में सिचाई प्रारंभ नहीं हो पाया।
वहीं, वर्ष 2019 में इसकी मरम्मती के नाम पर लाखों के खेल
वहीं, वर्ष 2019 में इसकी मरम्मती के नाम पर लाखों के खेल हुए। इसकी भवन के छत को तोड़कर पुनः नए सिरे से छत डाले गए। दीवारों में झड़े हुए प्लास्टर की जगह नए प्लास्टर किए गए। मोटर एवं ट्रांसफार्मर लगाने की कवायद हुई कि खेतों में सिंचाई के लिए पानी पहुंच सके। लेकिन, राशि हड़पने के साथ खेल खत्म हो गए।
फिर भी,विद्युतीकरण से नहीं जोड़ा गया।
पाइप जगह-जगह टूट गई थी। उसे ठीक कर दिया गया। लेकिन, फिर भी इसे विद्युती करण से नहीं जोड़ा गया। इस कारण वह पुनः आज तक चालू नहीं हो पाया। इस कारण किसानों के खेत में सिचाई की जो सुविधा होती वह आज तक चालू नहीं हो पाया।
दो गांवों के दो सौ एकड़ से अधिक भूमि में जहां
इस नलकूप के चालू हो जाने से इन दो गांवों के दो सौ एकड़ से अधिक भूमि में जहां फसलों की सिंचाई होने से किसानों की अच्छी पैदावार होती है। वहीं इसके चालू नहीं होने के कारण इस वर्ष कम बारिश होने के कारण खेतों में फसल जलकर बर्बाद होने के कगार पर है, जिसे किसान चाहकर भी नहीं बचा पा रहे हैं।
आज तक इसे चालू करने की कोई भी पहल नहीं दिख रही।
सिंचाई योजना के तहत लगाए गए नलकूप के चालू हो जाने से जहां नदियों में पानी बहकर बेकार जा रहा है वह किसानों के खेत में जाने से फसलों की अच्छी उपज होती, वहीं खेतों में लगाए गए निजी नलकूप की ओर से जो पानी धरती के अंदर से निकल रहा है।
शिकायतों का दौर चलता रहा, मगर किसी ने सुनी, किसानों के दिल पर टूटता रहा पानी नहीं मिलने का साल-दर-साल दर्द…
इससे जमीन के अंदर का पानी का लेवल जो कम हो रहा है वह भी इसके चालू हो जाने से नहीं हो पता। इस संबंध में कई बार स्थानीय लोगों ने विभागीय पदाधिकारी से लेकर प्रखंड एवं जिला के पदाधिकारी को कई बार शिकायत भी की गई। लेकिन, आज तक इसे चालू करने की कोई भी पहल नहीं दिख रही।

