Free Trade Agreement: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच 18 साल की लंबी और जटिल बातचीत के बाद आखिरकार मंगलवार को एक ऐतिहासिक क्षण आया, जब दोनों पक्षों ने बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिया। इस डील से जहां कई भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में नई राह मिलेगी, वहीं कुछ संवेदनशील भारतीय क्षेत्रों को रणनीतिक रूप से बाहर रखा गया है, ताकि छोटे किसानों के हितों की रक्षा की जा सके। यह कदम व्यापार संतुलन और घरेलू कृषि की सुरक्षा के बीच एक सूक्ष्म संतुलन को दर्शाता है।
भारत-EU Free Trade Agreement: डेरी, चावल, गेहूं जैसे उत्पादों पर टैरिफ में छूट नहीं – जानिए क्यों
भारत-यूरोपीय यूनियन Free Trade Agreement: क्यों संवेदनशील क्षेत्रों को रखा गया बाहर?
वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी दी कि यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ हुए इस व्यापार समझौते में भारत ने डेयरी उत्पाद, चावल, गेहूं, दालें, चाय, आनुवंशिक रूप से संवर्धित (जीएम) उत्पाद और कॉफी जैसे महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम नहीं किया है। इसके अलावा, बीफ एवं पोल्ट्री, मछली एवं समुद्री उत्पाद, पनीर, मक्का, फल एवं सब्जियां, मेवे, खाद्य तेल और तंबाकू जैसे उत्पादों को भी टैरिफ के दायरे से बाहर रखा गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह निर्णय भारत की घरेलू कृषि अर्थव्यवस्था और लाखों छोटे व सीमांत किसानों की आजीविका को सीधे प्रभावित करता है, इसलिए इन क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत ने अब तक किसी भी देश के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में अपने डेयरी सेक्टर को टैरिफ के तहत मिलने वाली छूट के दायरे से बाहर रखा है और भविष्य में भी इसे संरक्षित रखा जाएगा। यह नीतिगत रुख देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
समझौते के महत्वपूर्ण बिंदु और बाजार पर प्रभाव
यूरोपीय संघ के साथ यह बहुप्रतीक्षित समझौता इसी साल साइन और लागू होने की संभावना है। 27 यूरोपीय देशों के इस समूह ने भी कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते के दायरे से बाहर रखा है, जिसमें मांस और मांस से बने उत्पाद, डेयरी उत्पाद, शहद, चावल, चीनी और तंबाकू शामिल हैं। यह दोनों पक्षों की अपनी-अपनी घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
इस समझौते के तहत, कई भारतीय कृषि उत्पादों को यूरोपीय बाजार में शुल्क रियायतें मिलेंगी, जिससे भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो भारतीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद करेगा।
मुख्य हाइलाइट्स:
- भारत को चाय, कॉफी, मसाले और टेबल ग्रेप्स जैसे कृषि उत्पादों की करीब 87 प्रतिशत शुल्क श्रेणियों में तरजीही बाजार पहुंच मिलेगी।
- ईयू कुछ समुद्री उत्पादों पर मौजूदा शून्य से 26 प्रतिशत तक के शुल्क दायरे में कटौती करेगा।
- इस कटौती से समुद्री उत्पादों के निर्यात में वृद्धि होने की संभावना है।
- ईयू का समुद्री उत्पाद आयात बाजार करीब 4.67 लाख करोड़ रुपये (53.6 अरब डॉलर) का है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है।
यह डील भारत के वैश्विक व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि समझौते के लाभ छोटे से छोटे किसान और निर्यातक तक पहुंचें। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। यह समझौता भारत के निर्यात को गति देने के साथ-साथ यूरोपीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच को भी बढ़ाएगा, लेकिन घरेलू हितों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
यहां तक कि यूरोपीय यूनियन ने भी अपने कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को टैरिफ के दायरे से बाहर रखा है। यह दिखाता है कि व्यापार समझौतों में राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना एक वैश्विक चलन है। भारत की यह रणनीति छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







