Bihar Tourism: त्योहारी सीजन से ठीक पहले नेपाल और तिब्बत में अचानक आई बाढ़ तथा भूस्खलन की घटनाओं ने बिहार के पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका दिया है। कनेक्टिविटी बाधित होने और बस सेवाएं बंद होने से नेपाल समेत हिमालयी इलाकों की यात्राओं के लिए सैकड़ों बुकिंग रद्द हो गई हैं। इसका सीधा असर बिहार के टूर ऑपरेटरों और यात्रियों पर पड़ रहा है।
बिहार से नेपाल जाने वाले पर्यटकों की संख्या हुई ‘शून्य’
पिछले दो दिनों में जताही और जनकपुर के रास्ते काठमांडू तथा पोखरा जाने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग शून्य हो गई है। त्रिशूली नदी के आसपास बने असामान्य हालात के मद्देनजर बस ऑपरेटरों ने अपनी सेवाएं रोक दी हैं। पटना, गया और मुजफ्फरपुर के टूर ऑपरेटरों को नेपाल, दार्जिलिंग और सिक्किम की यात्राएं रद्द करने के लगातार अनुरोध मिल रहे हैं। कई परिवार अपनी यात्राएं दिसंबर या जनवरी तक टाल रहे हैं, वहीं कुछ यात्री राजस्थान, गोवा और दक्षिण भारत जैसे वैकल्पिक पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं। बिहार टूरिज्म एसोसिएशन के सचिव ने बताया, ‘सितंबर के बाद बिहार से नेपाल जाने वाले पर्यटकों की संख्या अक्सर बढ़ जाती है। लेकिन नेपाल में आई हालिया त्रासदी ने लोगों के मन में छुट्टियों के मौसम में पड़ोसी देश की यात्रा को लेकर डर पैदा कर दिया है।’
पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राज्य के पर्यटन क्षेत्र को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
दो सौ से ज्यादा बुकिंग रद्द, दशहरा पर 45% गिरावट का अनुमान
बाढ़ के कारण पर्यटकों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। सितंबर से अक्टूबर के बीच काठमांडू, पोखरा और पशुपतिनाथ बिहार के यात्रियों के पसंदीदा स्थलों में शामिल रहे हैं, लेकिन अब इन यात्राओं पर ब्रेक लग गया है। टूर ऑपरेटरों के अनुसार, पर्यटक आमतौर पर रक्सौल और बीरगंज के रास्ते सड़क मार्ग से या बीरगंज से उड़ान भरकर काठमांडू पहुंचते हैं। बिहार से ज्यादातर यात्री कैलाश मानसरोवर के बजाय काठमांडू और नेपाल के अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थलों की यात्रा करते हैं।
बाढ़ के चलते तय यात्राएं रद्द होने से बस ऑपरेटरों और टूर एजेंसियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। नेपाल और पहाड़ी इलाकों की यात्रा की योजना बना रहे कई समूहों ने अपने टूर रद्द कर दिए हैं। 31 अगस्त को नेपाल जाने वाले 40 लोगों के एक कॉर्पोरेट समूह ने अपनी यात्रा रद्द कर दी, जबकि 3 सितंबर की यात्रा के लिए तैयार 60 लोगों के एक अन्य समूह ने भी बुकिंग कैंसिल कर दी। अगस्त के अंत और सितंबर के पहले सप्ताह में यात्रा की योजना बनाने वाले कई परिवारों ने भी अपने प्लान बदल दिए हैं।
टूर एंड ट्रैवल एजेंसियों से जुड़े लोगों का कहना है कि दो सुस्त सालों के बाद इस बार दशहरा सीजन के काफी अच्छा रहने की उम्मीद थी। हालांकि, नेपाल में बाढ़ की खबरों के बाद से नेपाल की बुकिंग में करीब 70 फीसदी की गिरावट आई है। यहां तक कि जिन लोगों ने दार्जिलिंग और सिक्किम की बुकिंग कराई थी, वे भी अब गोवा, राजस्थान या केरल जाने की बात कर रहे हैं। अब तक दो सौ से ज्यादा बुकिंग रद्द हो चुकी हैं। बिहार टूरिज्म एसोसिएशन का अनुमान है कि पिछले साल की तुलना में इस दशहरा बिहार से पहाड़ी इलाकों की यात्रा की बुकिंग में 40-45 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। ट्रैवल एजेंटों के मुताबिक, नेपाल टूर पैकेज को लेकर पूछताछ में भी भारी कमी आई है, जबकि समुद्र तटों और अन्य अपेक्षाकृत सुरक्षित पर्यटन स्थलों के बारे में पूछताछ बढ़ी है।
आगे क्या?
नेपाल में स्थिति सामान्य होने तक बिहार के पर्यटन उद्योग पर इसका नकारात्मक प्रभाव जारी रहने की आशंका है। टूर ऑपरेटरों और पर्यटन विभाग के सामने अब यात्रियों का विश्वास बहाल करने और उन्हें सुरक्षित वैकल्पिक गंतव्यों की ओर मोड़ने की चुनौती है।







