Bihar Government: उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने बिहार की एनडीए सरकार के 100 दिन पूरे होने पर सरकार के कामकाज, विकास योजनाओं, बाढ़ प्रबंधन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की एनडीए सरकार जनता द्वारा दिए गए जनादेश के अनुरूप कार्य कर रही है। चौधरी ने बताया कि जल संसाधन विभाग ने बाढ़ और संभावित सूखे, दोनों परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से ही व्यापक तैयारियां कर ली हैं।
भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों पर विजय चौधरी ने कहा कि यदि किसी के पास ठोस प्रमाण हैं तो सरकार जांच कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार की जनता ने वर्ष 2025 से 2030 तक के लिए एनडीए को जनादेश दिया है और सरकार उसी दिशा में काम कर रही है। उनके अनुसार, पिछले दो दशकों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में विकास और सुशासन की जो कार्यशैली बनी है, उसे ही आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी पद संभालने के बाद कई बार स्पष्ट किया है कि सरकार विकास और सुशासन की उसी नीति पर आगे बढ़ेगी, जिसे पहले से लागू किया गया था।






केंद्र के सहयोग से मिली योजनाओं को गति
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय के कारण बिहार की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति मिली है। राज्य के विकास से जुड़ी योजनाओं को मंजूरी मिलने के साथ ही आर्थिक सहयोग भी प्राप्त हो रहा है। जल संसाधन विभाग की परियोजनाओं में भी केंद्र का लगातार सहयोग मिल रहा है, जिससे कई योजनाओं को आगे बढ़ाने में सुविधा हुई है।
बाढ़ और सूखे से निपटने की नई रणनीति
बाढ़ की तैयारियों पर विजय चौधरी ने कहा कि बिहार की स्थिति केवल राज्य के भीतर होने वाली बारिश पर निर्भर नहीं करती। उत्तर बिहार में नेपाल में अधिक वर्षा होने पर घाघरा, गंडक, कोसी और महानंदा जैसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। वहीं दक्षिण बिहार में झारखंड में होने वाली भारी बारिश का असर नदियों पर पड़ता है और कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष दक्षिण बिहार के नालंदा, जहानाबाद और आसपास के कई जिले बाढ़ से प्रभावित हुए थे। इस बार अब तक हालात सामान्य हैं, लेकिन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। संवेदनशील तटबंधों को मजबूत किया गया है और आपातकालीन सामग्री पहले से उपलब्ध करा दी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार ने बाढ़ और अल्पवृष्टि दोनों स्थितियों को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी को नहरों और जलाशयों में संग्रहित किया जाएगा। बाद में इसी पानी का उपयोग कम बारिश की स्थिति में किसानों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराने में किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य केवल बाढ़ नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को हर मौसम में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता है।
उन्होंने मौसम की स्थिति का भी उल्लेख किया। विजय चौधरी ने कहा कि मौसम वैज्ञानिक एल नीनो के प्रभाव की संभावना जता रहे हैं, हालांकि मौसम संबंधी अनुमान समय-समय पर बदलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि अभी अपेक्षा के अनुरूप बारिश नहीं हुई है, इसी कारण सरकार संभावित सूखे और बाढ़ दोनों परिस्थितियों के लिए समान रूप से तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि बिहार में लगभग हर वर्ष नदियों में बाढ़ की चुनौती सामने आती है। सरकार का प्रयास है कि नदियों का प्रवाह बीच धारा में बना रहे, जिससे कटाव और बाढ़ के जोखिम को कम किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि नदियों में लगातार बढ़ रही गाद बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि इससे जलधारण क्षमता प्रभावित होती है।
भ्रष्टाचार पर सरकार का कड़ा रुख
विजय चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार की राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति अंतिम चरण में है। इसके लागू होने के बाद बिहार को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। उनके अनुसार इससे नदियों के संरक्षण में मदद मिलेगी, बाढ़ का खतरा कम होगा और सिंचाई के लिए जल उपलब्धता भी बेहतर होगी। भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता के साथ काम कर रही है। यदि कोई व्यक्ति किसी तरह के आरोप लगाता है तो उसे प्रमाण भी प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाने से कार्रवाई नहीं होती। यदि ठोस दस्तावेज या सबूत उपलब्ध कराए जाते हैं तो सरकार निष्पक्ष जांच कराने में कोई देरी नहीं करेगी।
वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाएं
केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार पर पूछे गए सवाल के जवाब में विजय चौधरी ने कहा कि मंत्री बनने की उम्मीद हर राज्य और हर दल में रहती है। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र सरकार बिहार के विकास पर लगातार ध्यान दे रही है और राज्य की विकास योजनाओं को मंजूरी देने के साथ आवश्यक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है। राजस्व घाटे पर उन्होंने कहा कि इसे हमेशा नकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं बल्कि जनता के विकास और कल्याण के लिए संसाधनों का उपयोग करना है। उन्होंने कहा कि राजस्व बढ़ाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है और वित्तीय स्थिति नियंत्रण में है। वहीं रखरखाव और शुल्क से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता होती है वहां अलग व्यवस्था बनाई जाती है, जबकि कई सेवाएं बिना किसी शुल्क के भी उपलब्ध कराई जाती हैं। यह दर्शाता है कि बिहार सरकार जन कल्याण और विकास के प्रति प्रतिबद्ध है।








