Darbhanga News: मिथिला में शैक्षणिक विकास के प्रबुद्ध हिमायती बाबू चंद्रधारी सिंह की 130वीं जयंती शुक्रवार को दरभंगा स्थित सी.एम. साइंस कॉलेज में मनाई गई। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. संजीव कुमार मिश्र के साथ कई शिक्षक और कर्मचारियों ने बाबू चंद्रधारी सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह कार्यक्रम उनकी शिक्षा, संस्कृति और विरासत के प्रति समर्पण को याद करने के लिए आयोजित किया गया था।







प्रधानाचार्य प्रो. संजीव कुमार मिश्र ने बाबू चंद्रधारी सिंह के विराट व्यक्तित्व और उनके असाधारण कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बाबू चंद्रधारी सिंह उन महान विभूतियों में से एक थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान और उसके बाद भी मिथिला में भारतीय शैक्षिक परंपरा और संस्कृति को स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किया। उनका योगदान मिथिला के शैक्षणिक परिदृश्य को बदलने में निर्णायक साबित हुआ।
मिथिला महाविद्यालय को आर्थिक संकट से उबारने वाले दानवीर
प्रो. मिश्र ने मिथिला महाविद्यालय को आर्थिक संकट से उबारने में बाबू चंद्रधारी सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह उन्हीं की सहायता का प्रतिफल है कि महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर हुआ। इस अभूतपूर्व मदद के लिए संपूर्ण महाविद्यालय परिवार हमेशा उनके प्रति कृतज्ञ रहेगा। बाबू चंद्रधारी सिंह ने न सिर्फ शिक्षा के प्रसार पर जोर दिया, बल्कि मिथिला की समृद्ध संस्कृति, कला और विरासत के संरक्षण को भी अपना ध्येय बनाया।
संस्कृति और विरासत के संरक्षक
दरभंगा का सी.एम. साइंस कॉलेज और चंद्रधारी संग्रहालय, जो उनके अभूतपूर्व सहयोग से संरक्षित हैं, आज भी उनके इस संकल्प के जीवंत प्रमाण हैं। इन संस्थानों के माध्यम से उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए ज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी दूरदर्शिता और परोपकारिता आज भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
इनकी रही उल्लेखनीय उपस्थिति
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार दास, रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. विश्व दीपक त्रिपाठी, गणित विभागाध्यक्ष डॉ. अभय सिंह, जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. पूजि अग्रहरि, वनस्पति विभागाध्यक्ष डॉ. खालिद अनवर, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश प्रसाद साह, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. युगेश्वर साह और मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. सत्येंद्र कुमार झा प्रमुख थे। सभी ने बाबू चंद्रधारी सिंह के योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया।









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