Darbhanga Flood: दरभंगा जिले में बाढ़ का पानी भले ही कम होने लगा हो, लेकिन हजारों लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दरभंगा के कुशेश्वरस्थान पूर्वी में कोसी और कमला बलान नदियों का जलस्तर घटने के बावजूद, यातायात की गंभीर समस्या बनी हुई है। सड़कें अब भी पानी में डूबी हैं, जिससे लोगों का जीवन पूरी तरह नावों के भरोसे चल रहा है।
नाव संचालकों की मनमानी से बेहाल ग्रामीण
बाढ़ प्रभावित इटहर पंचायत के इटहर, चौकिया, लक्ष्मिनियाँ, बलथरवा, पोखर सहित तिलकेश्वर और सूघराईन पंचायत के निचले इलाकों में अभी भी पानी फैला हुआ है। ऐसे में नाव ही आवागमन का एकमात्र साधन है। लेकिन निजी नाव संचालकों की मनमानी से ग्रामीण बेहद परेशान हैं।







चौकिया निवासी बसंत राम बताते हैं कि उन्हें अपनी बाइक किनारे छोड़कर नाव से कमला बलान के पश्चिमी तटबंध तक जाना पड़ता है। नाव का किराया 10 से 20 रुपये है, लेकिन नाविक तब तक नाव नहीं खोलते जब तक पूरी सवारी और पूरा किराया न मिल जाए। इससे उन्हें समय पर अपने ऑफिस पहुंचने में काफी मुश्किल होती है।
इसी गांव की मीणा देवी ने बताया कि नाविक 10 से 20 रुपये तक वसूल रहे हैं और कहते हैं कि मशीन वाली नाव में डीजल के लिए पैसा पूरा होगा, तभी नाव चलेगी। इटहर के राजकुमार राय और सैनी मुखिया सहित दर्जनों ग्रामीणों ने भी नावों को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। ग्रामीणों का आरोप है कि अंचल प्रशासन को नाविकों द्वारा की जा रही इस वसूली की जानकारी दी जा चुकी है, इसके बावजूद मनमानी जारी है।
रोजमर्रा की जरूरतें बनी चुनौती, पशु चारे का भी संकट
बाढ़ के कारण सिर्फ आवागमन ही नहीं, बल्कि आवश्यक सामान लाने, बीमारों को अस्पताल पहुंचाने और बच्चों की पढ़ाई में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं। कई परिवार तो अपने घरों में ही फंसे हुए हैं। पशुओं के लिए चारे की किल्लत भी अब गंभीर रूप लेने लगी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पर्याप्त सरकारी नावों की व्यवस्था करने, राहत सामग्री, तिरपाल, खाद्यान्न और मेडिकल कैंप लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली, तो स्थिति और भी विकट हो सकती है।
सीओ राकेश रोशन भारती ने इस संबंध में बताया, ‘आपदा मित्रों को बुलाया गया है। जहां भी समस्या है, उसका निदान किया जाएगा। नाविकों द्वारा पैसे लिए जाने की शिकायत पर उन्होंने कहा कि कौन नाविक वसूली कर रहा है, उसकी पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।’ उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार को उन्होंने क्षेत्र का भ्रमण किया था और बाढ़ के पानी में कमी दर्ज की गई है।
प्रशासन के आश्वासन के बावजूद, जमीनी स्तर पर ग्रामीणों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही सरकारी मदद उन तक पहुंचेगी और उन्हें निजी नाव संचालकों की मनमानी से मुक्ति मिलेगी।









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