Bihar Police: राज्य में अपराध और अपराधियों पर लगाम कसने के लिए बिहार पुलिस ने अब आधुनिक तकनीकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। छोटे अपराधियों से लेकर बड़े माफिया तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिसे क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (CCTNS) के माध्यम से साझा किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (विधि व्यवस्था एवं कमजोर वर्ग) के.एस. अनुपम ने इस नई पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अपराध से संबंधित सभी सूचनाओं को आधुनिक तकनीक के जरिए सुरक्षित रखा जा रहा है और देश भर के पुलिस स्टेशनों तक पहुंचाया जा रहा है। यदि किसी मामले में अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता होगी, तो यह जानकारी इंटरपोल के साथ भी साझा की जा सकेगी।
अपराधियों का डिजिटल डेटाबेस और ऑनलाइन सत्यापन
के.एस. अनुपम ने स्पष्ट किया कि अब अपराध करने के बाद बच निकलना पहले से कहीं अधिक कठिन होगा, क्योंकि अपराधियों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया गया है। पुलिस ने युवाओं से आपराधिक गतिविधियों से दूर रहने और कानून का पालन करने की अपील की है, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।






युवाओं के लिए ‘विधि पालक’ अभियान और सोशल मीडिया निगरानी
पुलिस मुख्यालय 21 जुलाई से 10 अगस्त तक ‘ऑपरेशन विधि पालक युवक’ अभियान शुरू करने जा रहा है। इस पहल के तहत, हाई स्कूल और कॉलेज के छात्रों को कानूनी प्रावधानों और उनके अधिकारों के बारे में जागरूक किया जाएगा। अभियान में पॉक्सो एक्ट, दहेज विरोधी कानून, घरेलू हिंसा और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने फेसबुक, एक्स (पहले ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ा दी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, धार्मिक या जातिगत टिप्पणियों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाले 514 आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो की पहचान की गई है। इनमें से 243 मामलों में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है।
हथियारों के प्रदर्शन और मानव तस्करी पर कार्रवाई
बिहार पुलिस सोशल मीडिया पर हथियार लहराते हुए वीडियो या तस्वीरें पोस्ट करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई कर रही है। 1 मई से 14 जुलाई के बीच ऐसे मामलों में 102 प्राथमिकी दर्ज की गईं और 130 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसी अवधि में 40 हथियार भी जब्त किए गए। इन मामलों में सबसे अधिक कार्रवाई पटना, नवगछिया, गोपालगंज, सीतामढ़ी और मोतिहारी जिलों में की गई। भगोड़े अपराधियों की संपत्ति की कुर्की और जब्ती के लिए भी एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने बताया कि 11 जुलाई से 20 जुलाई के बीच कुल 2,125 कुर्की और जब्ती की कार्रवाई की गई। के.एस. अनुपम ने बताया कि ‘ऑपरेशन नया सवेरा-3.0’ के तहत, जो 1 जुलाई से 14 जुलाई तक चलाया गया, पुलिस ने 52 प्राथमिकी दर्ज कीं। इस दौरान 109 कथित मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया और 157 व्यक्तियों को बचाया गया, जिनमें 82 महिलाएं और 75 पुरुष शामिल थे। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, मई और जून के महीनों में सांप्रदायिक हिंसा, पुलिसकर्मियों पर हमले, मॉब लिंचिंग और हर्ष फायरिंग से संबंधित मामलों में कुल 533 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसी अवधि में 49,000 से अधिक गवाहों के बयान अदालतों में दर्ज किए गए।
बिहार पुलिस का लक्ष्य राज्य में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना और अपराध मुक्त समाज का निर्माण करना है। डिजिटल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया निगरानी जैसी पहलें इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इन व्यापक कार्रवाइयों से यह स्पष्ट होता है कि बिहार पुलिस अपराध के खिलाफ एक मजबूत और बहुआयामी रणनीति अपना रही है। आने वाले समय में इन प्रयासों से राज्य में अपराध दर में कमी आने और जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ने की उम्मीद है।








