Bihar Private University Bill: पटना: बिहार विधानसभा ने बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया है। इस महत्वपूर्ण विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के लाखों छात्रों के शैक्षणिक पलायन को रोकना और उन्हें अपने गृह राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री बिहार के सम्राट चौधरी ने सदन में इस विधेयक के पक्ष में विस्तार से अपनी बात रखी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “आज बड़ी संख्या में बिहार के छात्र बेहतर उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। अकेले 30 हजार से अधिक छात्र एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि करीब 11 हजार छात्र लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत हैं। देश के विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में बिहार के लाखों छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इससे न केवल छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है, बल्कि राज्य की प्रतिभा भी बाहर चली जाती है। सरकार चाहती है कि बिहार के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा अपने ही राज्य में उपलब्ध हो।”
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छात्रों को राज्य में ही मिलेंगे बेहतर अवसर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यदि राज्य में अधिक निजी विश्वविद्यालय स्थापित होंगे तो छात्रों को पढ़ाई के लिए बाहर जाने की आवश्यकता कम पड़ेगी। इससे उनके समय, धन और संसाधनों की बचत होगी, साथ ही बिहार शिक्षा के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का उद्देश्य निजी संस्थानों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि बिहार के छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है। उनका मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर शिक्षा का माहौल मजबूत होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी सकारात्मक लाभ मिलेगा।
बिहार के छात्रों को मिली बड़ी राहत! अब अपने ही राज्य में मिलेगी विश्वस्तरीय शिक्षा
Bihar Education: बिहार विधानसभा में ‘बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026’ ध्वनिमत से पारित हो गया है। इस विधेयक का मुख्य लक्ष्य राज्य के लाखों छात्रों के शैक्षणिक पलायन को रोकना और उन्हें अपने ही प्रदेश में उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस ऐतिहासिक कदम को बिहार के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव बताया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में विधेयक के पक्ष में अपनी बात रखते हुए कहा कि आज बिहार के हजारों छात्र अच्छी उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने पर मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि अकेले एमिटी यूनिवर्सिटी में 30 हजार से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं, जबकि लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में भी करीब 11 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। देश के विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों में लाखों बिहारी छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस पलायन से छात्रों और उनके अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है, साथ ही राज्य की प्रतिभा भी बाहर चली जाती है।
सरकार की मंशा है कि बिहार के छात्रों को अपने राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा मिल सके। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि अधिक निजी विश्वविद्यालय स्थापित होने से छात्रों को बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी, जिससे समय, धन और संसाधनों की बचत होगी और बिहार शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ेगा।
निजी विश्वविद्यालयों पर विपक्ष के सवाल
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने कई गंभीर सवाल उठाए। एआईएमआईएम विधायक अख्तरूल ईमान ने आशंका जताई कि निजी विश्वविद्यालयों को बढ़ावा देने से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि निजी संस्थानों की अधिक फीस के कारण गरीब परिवारों के बच्चे शिक्षा से वंचित रह सकते हैं। ईमान ने सरकार से विधेयक में संशोधन कर गरीब छात्रों के हितों की स्पष्ट व्यवस्था करने की मांग की।
राष्ट्रीय जनता दल के विधायक राहुल शर्मा ने भी विधेयक पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि निजी विश्वविद्यालयों को अनुमति देने से पहले छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि केवल निजी संस्थानों को लाभ पहुंचाने के बजाय, छात्रों के अधिकार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और फीस नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं विधेयक में स्पष्ट रूप से शामिल हों।
उच्च शिक्षा मंत्री का स्पष्टीकरण: 2013 का कानून, 11 विश्वविद्यालय
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया कानून नहीं है, बल्कि पहले से लागू ‘बिहार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2013’ में आवश्यक संशोधन किया गया है। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम वर्ष 2013 में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान व्यापक चर्चा के बाद लागू हुआ था।
मंत्री संजय टाइगर ने कहा कि वर्तमान संशोधन का उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों के अनुरूप बदलाव करना और नए निजी विश्वविद्यालयों को अधिनियम में शामिल करना है। उन्होंने जानकारी दी कि इस अधिनियम के तहत अब तक 11 निजी विश्वविद्यालयों को मान्यता मिल चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि यूजीसी के निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले अन्य संस्थानों को भी अवसर दिया जाएगा ताकि राज्य में उच्च शिक्षा का दायरा और बढ़ सके।
संजय टाइगर ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ने से छात्रों को बिहार में ही आधुनिक शिक्षा, नए पाठ्यक्रम और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी। इससे रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और बिहार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाएगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का छात्रों को आश्वासन
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में दोहराया, “सरकार का उद्देश्य निजी संस्थानों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि बिहार के छात्रों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है।”
उन्होंने कहा कि राज्य में विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय स्थापित होने से बिहार के लाखों छात्रों का पलायन रुकेगा, स्थानीय स्तर पर शिक्षा का माहौल मजबूत होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी इसका सकारात्मक लाभ मिलेगा। विस्तृत चर्चा, विपक्ष के सुझावों और सरकार के जवाब के बाद, बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को अंततः ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सरकार को उम्मीद है कि इस संशोधन के बाद बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और छात्रों को अपने राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे।
विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार ने दिया जवाब
हालांकि, बिहार निजी विश्वविद्यालय विधेयक को लेकर विधानसभा में विपक्ष की ओर से कई सवाल भी उठाए गए। एआईएमआईएम विधायक अख्तरूल ईमान ने आशंका जताई कि निजी विश्वविद्यालयों को बढ़ावा देने से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के सामने उच्च शिक्षा का संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने फीस में वृद्धि के कारण गरीब परिवारों के बच्चों के शिक्षा से वंचित होने की चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से विधेयक में संशोधन कर गरीब छात्रों के हितों की स्पष्ट व्यवस्था करने की मांग की।
राष्ट्रीय जनता दल के विधायक राहुल शर्मा ने भी विधेयक पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि निजी विश्वविद्यालयों को अनुमति देने से पहले छात्रों के हित सर्वोपरि रहने चाहिए। उन्होंने मांग की कि केवल निजी संस्थानों को लाभ पहुंचाने के बजाय विधेयक में छात्रों के अधिकार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और फीस नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए।
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री संजय टाइगर ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया कानून नहीं है, बल्कि पहले से लागू अधिनियम में आवश्यक संशोधन किया गया है। उन्होंने बताया कि बिहार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम वर्ष 2013 में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान व्यापक चर्चा के बाद लागू किया गया था। वर्तमान संशोधन का उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानकों के अनुरूप बदलाव करना और नए निजी विश्वविद्यालयों के नाम अधिनियम में शामिल करना है।
संजय टाइगर ने जानकारी दी कि इस अधिनियम के तहत अब तक 11 निजी विश्वविद्यालयों को मान्यता दी जा चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यूजीसी के निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को आगे भी अवसर दिया जाएगा ताकि राज्य में उच्च शिक्षा का दायरा बढ़ सके। मंत्री ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ने से छात्रों को अपने राज्य में ही आधुनिक शिक्षा, नए पाठ्यक्रम और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलेंगी, जिससे रोजगारोन्मुख शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और बिहार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।
उच्च शिक्षा में बढ़ेगा निवेश
सदन में विस्तृत चर्चा, विपक्ष के सुझाव और सरकार के जवाब के बाद बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सरकार को उम्मीद है कि इस संशोधन के बाद बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और छात्रों को अपने राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे उनका भविष्य उज्जवल होगा।















