Bihar Health Department: बिहार स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों में नेत्र चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विभाग ने सभी अस्पतालों में संचालित नेत्र ओपीडी (Eye OPD) और नेत्र ऑपरेशन थिएटर (Eye OT) का गहन विश्लेषण (गैप एनालिसिस) कराने का निर्देश जारी किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य आधुनिक उपकरणों की कमी को दूर करना और मरीजों को जिला स्तर पर ही बेहतर नेत्र उपचार उपलब्ध कराना है। यह कदम राज्य सरकार के सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
स्थानीय स्तर पर मिलेगी आधुनिक नेत्र चिकित्सा
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में बिहार के केवल 25 जिला अस्पतालों में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध है। अब विभाग सभी जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों में नेत्र ओपीडी और नेत्र ओटी की मौजूदा स्थिति का विस्तृत आकलन करेगा। इस प्रक्रिया में यह जांच की जाएगी कि किन अस्पतालों में कौन से उपकरण मौजूद हैं और किन संसाधनों की तत्काल आवश्यकता है। इसी विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर अस्पतालों को आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएं मिल सकें।






स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने इस संबंध में बताया कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि लोगों को आंखों के इलाज और ऑपरेशन के लिए बड़े शहरों की ओर न भागना पड़े। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों में आधुनिक मशीनें, सभी आवश्यक संसाधन और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि नेत्र ओपीडी और नेत्र ओटी को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जाएगा, जिससे मोतियाबिंद सहित अन्य नेत्र रोगों का समय पर और प्रभावी इलाज सुनिश्चित हो सकेगा। इससे मरीजों को अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत भी काफी कम हो जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के हर नागरिक को उसके नजदीकी सरकारी अस्पताल में ही बेहतरीन नेत्र चिकित्सा सुविधा मुहैया हो।
डिजिटल निगरानी से सुधरेगी सुविधाओं की गुणवत्ता
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार, सभी जिला और अनुमंडलीय अस्पताल भारतीय जन स्वास्थ्य मानक (IPHS) के अनुरूप उपलब्ध उपकरणों की समीक्षा करेंगे। इस समीक्षा के बाद, वास्तविक आवश्यकताओं के आधार पर उपकरणों की कमी की पहचान की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जरूरत के मुताबिक आधुनिक संसाधन चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार हो सके।
उपकरणों की निगरानी और उनके प्रभावी उपयोग के लिए विभाग ने एक डिजिटल व्यवस्था भी लागू की है। सभी अस्पतालों में उपलब्ध उपकरणों का सत्यापन बीईएमएमपी (BEMMP) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। यह प्रणाली उपकरणों की उपलब्धता, उनके उपयोग और रखरखाव की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करेगी। अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपनी गैप एनालिसिस रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर राज्य स्वास्थ्य समिति को भेजें, ताकि आगे की कार्यवाही तेजी से की जा सके।
इस पहल से न केवल बिहार के दूरदराज के क्षेत्रों में नेत्र रोगियों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि यह राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को भी मजबूत करेगा। आने वाले समय में, गैप एनालिसिस रिपोर्ट के आधार पर उपकरणों की खरीद और कर्मचारियों के प्रशिक्षण से स्थानीय स्तर पर नेत्र चिकित्सा का स्तर काफी ऊपर उठेगा, जिससे मरीजों को बेहतर और सुलभ इलाज मिल पाएगा।








