देशज टाइम्स ने कल यानी मंगल को तेजप्रताप यादव की रिहाई के वक्त जो तस्वीर लगाई थी वो आप आज भी देख रहे। दरअसल, देशज टाइम्स खबरों का गरम भांप है। देशज टाइम्स ने यह तस्वीर लगाकर, लालू परिवार की एका की लौटती राजनीतिक निहितार्थ और आगामी पिक्चर के संकेत दिए थे जो आज से दिखने लगा है। पढ़िए ताजा रिपोर्ट… तेज़ के तेजस्वी
Bihar Politics: जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में नीट पेपर लीक के खिलाफ देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन का असर बिहार में भी साफ दिखाई दिया। पटना से लेकर सीवान, छपरा, भागलपुर, बांका, बेगूसराय और सहरसा तक लगभग हर जिले में हजारों छात्र सड़कों पर उतरे। इस दौरान कई जगहों पर छात्रों और नेताओं को गिरफ्तार किया गया, जिनमें तेजप्रताप यादव भी शामिल थे।






विरोध प्रदर्शन और जेल से रिहाई
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित पेपर लीक के विरोध में तेजप्रताप यादव छात्रों के साथ सड़क पर उतरे थे। प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया और फिर बेउर जेल भेज दिया गया। अब तेजप्रताप यादव जेल से रिहा हो चुके हैं, लेकिन उनकी रिहाई ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर नई हलचल पैदा कर दी है। गौरतलब है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) पेपर लीक मामले में भी आर्थिक अपराध इकाई ने डॉ. मनीष कुमार को गिरफ्तार किया है, और अब तक कुल 296 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
क्या परिवार में पिघल रही है बर्फ?
पिछले कुछ महीनों से तेजप्रताप यादव परिवार और राजनीति दोनों मोर्चों पर अलग-थलग दिख रहे थे। बेउर जेल से बाहर आते ही उनकी पहली मंजिल कोई राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि माता राबड़ी देवी का घर बनी। राबड़ी देवी के घर से आ रही खबरों ने बिहार की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या लालू परिवार में लंबे समय से चली आ रही नाराजगी अब खत्म होने की शुरुआत हो रही है? क्या रिश्तों की बर्फ पिघलने लगी है?
तेजस्वी यादव का पहले अपने भाई की गिरफ्तारी पर खुलकर विरोध करना और रिहाई के बाद दोनों भाइयों का आमने-सामने मिलना राजनीतिक गलियारों में नए संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि परिवार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन घटनाक्रम ने अटकलों को जरूर तेज कर दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मुलाकात का बिहार की राजनीति और लालू परिवार के भीतर के समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।








