VHP Mandir Andolan: विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने सरकारी नियंत्रण वाले हिंदू धर्मस्थलों की ‘मुक्ति’ के लिए एक नया और बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कर्नाटक के मेंगलुरु में यह घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष राम मंदिर आंदोलन जितना ही विशाल होगा और इसका लक्ष्य मंदिरों को सरकार के कब्जे से मुक्त कराकर हिंदू समाज को लौटाना है। इस घोषणा से बिहार समेत पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है।
VHP Mandir Andolan: विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने देश में एक और बड़ा ‘मंदिर आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान किया है। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने गुरुवार को कर्नाटक के मेंगलुरु में यह घोषणा करते हुए कहा कि अब मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन राम मंदिर आंदोलन की तरह ही बड़ा और निर्णायक होगा। VHP का कहना है कि सरकारें मस्जिदों, गुरुद्वारों या चर्चों का प्रबंधन नहीं करतीं, तो हिंदू मंदिरों का प्रबंधन क्यों करती हैं और उनकी आय अपने खजाने में क्यों जमा करती हैं?






आलोक कुमार ने बताया कि इस आंदोलन का लक्ष्य देश के सभी मुख्यमंत्रियों और सरकारों से मंदिरों को हिंदू समाज को वापस लौटाने की मांग करना है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मंदिर के पैसे को अपने खजाने में जमा किया जाता है, ऑडिट फीस के नाम पर अलग से शुल्क लिया जाता है, और CEO जैसे अधिकारियों की तनख्वाह भी मंदिर की आय से दी जाती है। VHP ने इस मुद्दे को पूरे देश में उठाने का संकल्प लिया है।
VHP का ‘मंदिर आंदोलन’ क्या है? सरकार पर क्यों साधा निशाना?
VHP के मुखिया आलोक कुमार ने सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अन्य धार्मिक स्थलों, जैसे मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, जैन आश्रम या बौद्ध मठों का संचालन नहीं करती, फिर मंदिरों के साथ ऐसा क्यों? उनका तर्क है कि मंदिरों की आय को सरकारी खजाने में जमा करना, ऑडिट शुल्क वसूलना और सीईओ जैसे अधिकारियों का वेतन मंदिर के पैसे से देना अनुचित है। VHP ने इसे हिंदू समाज के अधिकारों का हनन बताया है और मंदिरों को पूरी तरह से हिंदू समाज को सौंपने की मांग की है।
आलोक कुमार ने कहा, “सरकार मस्जिद नहीं चलाती, गुरुद्वारा नहीं चलाती, चर्च नहीं चलाती, जैन आश्रम और बौद्ध मठ नहीं चलाती तो वह मंदिर क्यों चलाती है? मंदिर का पैसा क्यों अपने खजाने में जमा करती है? ऑडिट फीस के नाम पर अलग से पैसा लेती है और वहां एक CEO बिठाकर उस बाबू की तनख्वाह और बाकी चीजें भी मंदिर की आय में से ही लेती है। विश्व हिंदू परिषद ने यह मामला पूरे देश में उठाने का तय किया है।”
क्या है VHP का प्लान? कैसे चलेगा ‘राम मंदिर आंदोलन-2’?
विश्व हिंदू परिषद ने इस नए आंदोलन के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की है। आलोक कुमार ने बताया कि आने वाले दिनों में संगठन के प्रतिनिधि विधायकों, सांसदों, मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों से मुलाकात करेंगे और उन्हें ज्ञापन सौंपकर मंदिरों को हिंदू समाज को लौटाने की मांग करेंगे। इसके साथ ही, इस आंदोलन के पक्ष में व्यापक जन समर्थन जुटाने के लिए देश के अलग-अलग शहरों में मशहूर हस्तियों के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। VHP का मानना है कि जिस तरह 1980 के दशक में शुरू हुए राम मंदिर आंदोलन और राम सेतु संघर्ष में उन्हें सफलता मिली थी, उसी तरह इस बार भी मंदिरों की मुक्ति के लिए संघर्ष सफल होगा। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) और गोरक्षा कानूनों के विस्तार को भी अपनी पिछली सफलताओं से जोड़ा।
राम मंदिर चंदे पर विपक्ष के आरोपों पर VHP का पलटवार
आलोक कुमार ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर विपक्षी दलों के प्रदर्शनों की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने ही इन गड़बड़ियों पर एफआईआर दर्ज करवाई थी और विशेष जांच दल (SIT) बनवाने की मांग की थी। उन्होंने संसद में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के उस कृत्य को सनातन धर्म का अपमान बताया, जिसमें वह साधु के वेश में चंदा चोरी करते दिखे थे। आलोक कुमार ने चेतावनी दी कि आगामी चुनावों में जनता ऐसे कृत्यों का करारा जवाब देगी। बिहार समेत देश के विभिन्न राज्यों में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गहमागहमी बढ़ने के आसार हैं।
VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने अपने बयान में दृढ़ता से कहा कि वे मंदिरों की मुक्ति के लिए हर संभव प्रयास करेंगे, चाहे इसके लिए कितना भी बड़ा आंदोलन क्यों न करना पड़े। उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि भारत सरकार मंदिरों को वापस हिंदू समाज को सौंपे।
सरकारी नियंत्रण क्यों, VHP ने उठाए सवाल
आलोक कुमार ने सरकारी नियंत्रण वाले मंदिरों पर तीखे सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब सरकार मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च, जैन आश्रम या बौद्ध मठ नहीं चलाती, तो वह हिंदू मंदिरों पर ही नियंत्रण क्यों रखती है? VHP अध्यक्ष ने मंदिरों की आय को सरकारी खजाने में जमा करने और ऑडिट फीस के नाम पर अलग से पैसे लेने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मंदिर की आय से ही CEO और अन्य ‘बाबू’ की तनख्वाह दी जाती है, जो अनुचित है। विश्व हिंदू परिषद ने इस मामले को पूरे देश में उठाने का संकल्प लिया है।
आने वाले समय में हम सभी मुख्यमंत्रियों और सरकारों को कहेंगे कि अब समय ऐसा आ गया है कि आपको हमारे मंदिर हमको वापस करने पड़ेंगे। जिस स्तर का आंदोलन चाहिए, जितना बड़ा आंदोलन चाहिए, वह आंदोलन करके और जिस तरह VHP ने राम जन्मभूमि के संघर्ष में सफलता पाई, राम सेतु के संघर्ष में सफल पाई… वैसे ही हम मंदिरों की मुक्ति के के लिए संघर्ष करेंगे। हम इस पर काम करेंगे कि भारत सरकार हमारे मंदिरों को हमें वापस सौंपे।
राम मंदिर आंदोलन जैसी सफलता का दावा
आलोक कुमार ने जोर देकर कहा कि VHP इस ‘मंदिर मुक्ति आंदोलन’ में भी राम जन्मभूमि और राम सेतु आंदोलनों जैसी सफलता हासिल करेगी। उन्होंने समान नागरिक संहिता और गोरक्षा कानूनों के उदाहरण दिए, जो अब देश के अधिकांश राज्यों में लागू हो रहे हैं या मजबूत हो रहे हैं। VHP का प्लान है कि आने वाले दिनों में विधायकों, सांसदों, मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके साथ ही, इस आंदोलन के पक्ष में जन समर्थन जुटाने के लिए देश के अलग-अलग शहरों में मशहूर हस्तियों के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
चढ़ावा चोरी पर विरोधियों को घेरा
आलोक कुमार ने हाल ही में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर विपक्षी दलों के प्रदर्शनों की आलोचना भी की। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने खुद इन गड़बड़ियों पर एफआईआर दर्ज करवाई और विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग की थी। VHP अध्यक्ष ने संसद में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के उस कृत्य की भी निंदा की, जिसमें वह साधु बनकर चंदा चोरी का प्रदर्शन कर रहे थे। आलोक कुमार ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया और चेतावनी दी कि आगामी चुनावों में जनता इसका करारा जवाब देगी। VHP का यह नया ‘मंदिर मुक्ति आंदोलन’ देश के धार्मिक और राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा असर डाल सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां बड़ी संख्या में मंदिर सरकारी नियंत्रण में हैं।








