Bihar Kanwar Yatra: 74 साल की उम्र, घुटनों में गंभीर चोटें, फिर भी आस्था का अद्भुत सफर जारी है। मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शिवभक्त ‘डाकबम’ कृष्णा बम ने एक बार फिर बाबा बैद्यनाथ के दरबार के लिए अपनी 43वीं कांवर यात्रा शुरू कर दी है। सुलतानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर रविवार को वह देवघर के लिए पैदल रवाना हो गईं, लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा बनकर।
कृष्णा बम वर्ष 1982 से लगातार बाबा बैद्यनाथ को कांवर चढ़ाती आ रही हैं। पिछले 42 वर्षों तक उन्होंने हर सोमवारी को डाक कांवर के माध्यम से सुलतानगंज से देवघर की 16 से 17 घंटे में दूरी तय कर जलार्पण किया। बीते वर्ष दोनों घुटने टूट जाने के कारण वह यात्रा नहीं कर पाई थीं।






बाबा की कृपा से मिली है यह ऊर्जा: कृष्णा बम
सुलतानगंज में गंगाजल उठाते ही उनके दर्शन और पैर छूकर आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान विशेष बातचीत में कृष्णा बम ने अपनी अटूट आस्था का जिक्र किया।
“जीवन में भयंकर से भयंकर कष्ट आए, लेकिन बाबा ने हमेशा आकर मुझे बचाया। 74 वर्ष की उम्र में यह ऊर्जा कहां से आती है, मैं नहीं बता सकती। यह सब बाबा की कृपा है। मेरी बस एक ही कामना है कि बाबा मेरा जल स्वीकार कर लें।”
उन्होंने यह भी बताया कि वह महाकाल (उज्जैन) और ओंकारेश्वर के लिए भी नर्मदा से कांवर लेकर चार दिनों तक पैदल चल चुकी हैं। यह उनका दृढ़ संकल्प ही है जो उन्हें इस उम्र में भी लगातार आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
डॉक्टर भी हैरान, बोले- यह उत्साह अद्भुत
यात्रा से पहले स्टेशन रोड स्थित डॉ. राम कुमार गुप्ता के आवास पर कृष्णा बम का मेडिकल चेकअप किया गया। जांच के बाद डॉ. राजन प्रियदर्शी ने उनके स्वास्थ्य को बिल्कुल ठीक बताया।
“74 वर्ष की उम्र में घुटने की गंभीर चोट के बावजूद ऐसा उत्साह और शारीरिक ऊर्जा देखना बेहद आश्चर्यजनक और अद्भूत है।”
डॉक्टरों ने भी उनकी इस अद्भुत ऊर्जा और आस्था को सलाम किया, जो इस उम्र में भी उन्हें बाबा के प्रति अपने कर्तव्य पथ पर अडिग रखती है।
श्रावणी मेला और मंदिर व्यवस्था पर अहम सुझाव
कृष्णा बम ने कांवरिया पथ की सुंदरता की सराहना की, साथ ही देवघर मंदिर और सुलतानगंज में व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
- **365 दिन अरघा व्यवस्था:** महाकाल और काशी विश्वनाथ की तर्ज पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भी सालभर अरघा से जलाभिषेक की स्थायी व्यवस्था होनी चाहिए।
- **स्पर्श पूजा का अलग समय:** स्पर्श पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग से समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि आम कांवरियों को परेशानी न हो।
- **राष्ट्रीय मेला का दर्जा:** देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए श्रावणी मेले को ‘राष्ट्रीय मेला’ का दर्जा मिलना चाहिए और सुलतानगंज में बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाया जाना चाहिए।
कृष्णा बम की यह 43वीं कांवर यात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अटूट विश्वास, अदम्य साहस और शारीरिक सीमाओं से परे जाकर लक्ष्य हासिल करने की एक मिसाल है। उनकी यह यात्रा लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।








