Bihar Festivals: हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से बिहार में अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। सितंबर माह में कई प्रमुख हिंदू त्योहार और व्रत पड़ रहे हैं, जो भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र होंगे। इस दौरान श्री कृष्ण जन्माष्टमी से लेकर पितृ पक्ष तक, कई बड़े पर्वों का आयोजन होगा।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी से गणेश चतुर्थी तक
सितंबर माह की शुरुआत भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के साथ होगी। 4 सितंबर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी, जब भक्त उपवास रखकर और मंदिरों व घरों में विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान के जन्म का उत्सव मनाएंगे। इसके बाद, 14 सितंबर को हरतालिका तीज और चतुर्थी चंद्र (चौठचंद्र) का पर्व मनाया जाएगा। हरतालिका तीज पर विवाहित महिलाएं विशेष रूप से व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं, जबकि चौठचंद्र भी धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है।
15 सितंबर को गणेश चतुर्थी का उत्साह देखने को मिलेगा। इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा कर सुख-समृद्धि और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करेंगे।
विश्वकर्मा पूजा और पितृ पक्ष का आरंभ
तकनीक और शिल्प के देवता भगवान विश्वकर्मा की पूजा 17 सितंबर को की जाएगी। इस दिन औजारों, मशीनों, कार्यस्थलों और अन्य उपकरणों की विशेष रूप से पूजा होती है। इसके बाद, 19 सितंबर को राधाष्टमी मनाई जाएगी, जब भक्त राधा रानी की आराधना करेंगे। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का पर्व होगा, और अगले दिन 26 सितंबर को श्रद्धालु महर्षि अगस्त्य को तर्पण अर्पित करेंगे।
ज्योतिषियों के अनुसार, भाद्रपद मास को धार्मिक अनुष्ठानों और दान-पुण्य के कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस महीने में किए गए कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है।
सितंबर माह के प्रमुख व्रत और त्योहार
| तिथि | त्योहार/पर्व |
|---|---|
| 4 सितंबर | श्री कृष्ण जन्माष्टमी |
| 11 सितंबर | कुशोतपाटिनी (कुशाग्रहिणी) अमावस्या |
| 14 सितंबर | हरतालिका तीज और चतुर्थी चंद्र (चौठचंद्र) |
| 15 सितंबर | गणेश चतुर्थी |
| 16 सितंबर | ऋषि पंचमी |
| 17 सितंबर | विश्वकर्मा पूजा |
| 19 सितंबर | राधाष्टमी |
| 23 सितंबर | हरिवासर्व्रत (इंद्र पूजा) |
| 25 सितंबर | अनंत चतुर्दशी |
| 26 सितंबर | महर्षि अगस्त्य को तर्पण |
| 27 सितंबर | पितृ पक्ष का आरंभ |
27 सितंबर से पितृ पक्ष का आरंभ होगा, जो पूर्वजों को समर्पित एक महत्वपूर्ण अवधि है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध और अन्य अनुष्ठान करते हैं।
आने वाला सितंबर माह बिहार सहित पूरे देश में धार्मिक आस्था और परंपराओं के रंग में रंगा रहेगा। इन पर्वों के माध्यम से लोग अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हुए आध्यात्मिक शांति प्राप्त करेंगे। भक्तों को इन तिथियों का ध्यान रखकर अपने पूजा-पाठ और अनुष्ठानों की योजना बनाने में मदद मिलेगी।








