Bihar Smart Meter: बिहार में स्मार्ट मीटर इस्तेमाल करने वाले लाखों उपभोक्ताओं के बैलेंस से अचानक पैसे कटने की खबरें सामने आने के बाद हड़कंप मच गया। इस स्थिति पर बिजली कंपनी ने अब चुप्पी तोड़ी है और इसके पीछे की वजह साफ कर दी है। कंपनी ने बताया कि जून और जुलाई महीने का बकाया फिक्स्ड चार्ज अगस्त के बिजली बिल में एकसाथ जोड़ दिया गया, जिसके कारण कई उपभोक्ताओं के प्री-पेड बैलेंस से अचानक ज्यादा रकम कट गई।
स्मार्ट मीटर का बिल कैसे बनता है?
स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं का बिजली बिल हर महीने की खपत और उस दौरान दर्ज सबसे ज्यादा लोड के आधार पर तैयार होता है। संबंधित महीने की बिजली खपत का बिल अगले महीने की 1 या 2 तारीख के आसपास बनाया जाता है। इसमें यह देखा जाता है कि उपभोक्ता ने कितनी यूनिट बिजली इस्तेमाल की और मीटर में अधिकतम कितना लोड दर्ज हुआ। इसी आधार पर बिजली की राशि और फिक्स्ड चार्ज तय किया जाता है।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिलती है। यदि किसी महीने बिजली की खपत 125 यूनिट से अधिक हो जाती है, तो सिर्फ 125 यूनिट से ऊपर इस्तेमाल हुई बिजली पर ऊर्जा शुल्क देना होता है। इसके साथ अतिरिक्त यूनिट पर बिजली कर भी लगता है। इसके अलावा, मीटर में दर्ज अधिकतम लोड के हिसाब से फिक्स्ड चार्ज भी लिया जाता है। यानी, 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त होने के बावजूद, इससे अधिक खपत करने पर तय नियम के अनुसार बाकी राशि चुकानी पड़ती है।
200 यूनिट खपत पर कितना बिल? आसान गणित समझिए
स्मार्ट मीटर के बिल का गणित एक उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए, किसी शहरी घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ता ने एक महीने में 200 यूनिट बिजली इस्तेमाल की और उसके मीटर में दर्ज लोड 2 किलोवाट है।
- कुल 200 यूनिट में से 125 यूनिट मुफ्त होंगी।
- उपभोक्ता को 75 यूनिट के लिए भुगतान करना होगा।
- इन 75 यूनिट का ऊर्जा शुल्क 537.75 रुपये बनता है।
- इस राशि पर 6 प्रतिशत बिजली कर यानी 32.27 रुपये जुड़ेंगे।
- 2 किलोवाट लोड के लिए 160 रुपये फिक्स्ड चार्ज लगेगा।
- इस तरह कुल बिल 730.02 रुपये होगा।
- इसमें सरकार की ओर से 75 यूनिट पर 247.50 रुपये की सब्सिडी घटाई जाएगी।
- इसके बाद उपभोक्ता को कुल 482.52 रुपये का भुगतान करना होगा।
जून-जुलाई का फिक्स्ड चार्ज अगस्त में क्यों कटा?
बिजली कंपनी के अनुसार, बिहार में बिलिंग सिस्टम को एक जगह से चलाने के लिए पहले इस्तेमाल हो रहे NIC और SAP बिलिंग सॉफ्टवेयर की जगह अब Revenue Management System लागू किया गया है। नई व्यवस्था शुरू करने के दौरान कुछ तकनीकी दिक्कतें आईं, जिन्हें दूर करने का काम तेजी से जारी है।
इसी तकनीकी समस्या के कारण जून और जुलाई महीने में 125 यूनिट से अधिक बिजली इस्तेमाल करने वाले कुछ शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के बिल में फिक्स्ड चार्ज उस समय नहीं जुड़ पाया था। अब इस बकाया राशि को अगस्त के बिजली बिल में एक साथ जोड़ा गया है। बिजली कंपनी ने साफ किया है कि जून और जुलाई में फिक्स्ड चार्ज का भुगतान नहीं होने के कारण किसी उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन नहीं काटा गया था। बाद में बकाया फिक्स्ड चार्ज को अगस्त के बिल में एकमुश्त एडजस्ट किया गया। कंपनी का कहना है कि यह कटौती तय बिजली दर के हिसाब से ही की गई है, इसमें उपभोक्ताओं से कोई अतिरिक्त पैसा नहीं लिया गया है।
‘बिहार में अब तक करीब 95 लाख उपभोक्ताओं के घर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 9,48,652 उपभोक्ताओं के मामले में जून और जुलाई का फिक्स्ड चार्ज बकाया रह गया था। इन सभी उपभोक्ताओं की लंबित फिक्स्ड चार्ज राशि करीब 54.95 करोड़ रुपये थी। अगस्त में इस पूरी बकाया राशि को उपभोक्ताओं के प्री-पेड बिजली बैलेंस से एडजस्ट किया गया है।’
यही वजह है कि कुछ स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को अगस्त में अपने बैलेंस में अचानक बड़ी कमी दिखाई दी। जिन लोगों का बैलेंस पहले से कम था, उनके लिए यह कटौती ज्यादा बड़ी नजर आई और बैलेंस खत्म होने की स्थिति भी बन सकती है।
बिजली कंपनी के मुताबिक, उपभोक्ताओं के बिल में की गई कटौती का अलग-अलग विवरण उपलब्ध है। इसलिए, अगर स्मार्ट मीटर का बैलेंस कम हुआ है तो उपभोक्ता अपने बिजली बिल में इसकी जानकारी देख सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति को बिल में हुई कटौती समझ नहीं आ रही है या उसे लगता है कि उसके खाते से गलत राशि काटी गई है, तो वह बिजली कंपनी से शिकायत कर सकता है।







