Bihar Sushant Singh Rajput: छह साल से अधिक का वक्त बीत गया, लेकिन पटना के उस घर की खामोशी आज भी नहीं टूटी. यह घर है दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के पिता का. वर्ष 2020 में बेटे को खोने के बाद, उनकी पत्नी भी साथ छोड़ गईं. इस गहरे दर्द के साथ उम्र और बिगड़ती तबीयत ने उन्हें घर तक सीमित कर दिया है. पहले जहां घर में चहल-पहल रहती थी, अब वहां सन्नाटा पसरा रहता है. लोग आते हैं, सुशांत की गाड़ी के साथ तस्वीरें लेते हैं, और उसकी यादें लेकर चले जाते हैं, पर दरवाजा बंद होते ही फिर वही खामोशी लौट आती है.
हाल ही में सुशांत की मौत से जुड़ा एक नया स्टिंग वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसकी खबर जब पिता तक पहुंची, तो उनका छह साल पुराना दर्द फिर जाग उठा. उन्हें पता है कि उनका बेटा वापस नहीं आएगा, लेकिन अब उन्हें सिर्फ इस बात का इंतजार है कि कोई ऐसी खबर आए, जो ‘गुलशन’ को भले वापस न ला सके, पर उसके जाने का सच सामने रख दे. उस सच के सहारे यह बुजुर्ग पिता अपनी तन्हा जिंदगी की शाम को थोड़ा आसान करना चाहते हैं.

पिता ने वायरल स्टिंग देखने से किया इनकार, बोले- ‘अब क्या फायदा?’
प्रभात खबर से खास बातचीत में सुशांत सिंह के मामा भूपेंद्र कुमार सिंह इस स्टिंग को लेकर भावुक हो उठे. उन्होंने बताया कि जब उन्हें वायरल स्टिंग वीडियो की जानकारी मिली, वह सुशांत के पिता के पास ही बैठे थे. शाम का वक्त था और दोनों रोज की तरह चाय पी रहे थे. तभी किसी ने बताया कि सुशांत की मौत को लेकर एक नया वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कई दावे किए जा रहे हैं. लेकिन सुशांत के पिता ने यह वीडियो देखने से साफ मना कर दिया.
सुशांत के पिता ने कहा, ‘अब क्या फायदा?’
एक पिता के मुंह से निकले ये दो शब्द शायद छह साल से अधिक लंबे इंतजार का पूरा दर्द समेटे हुए हैं. हर बार सुशांत की मौत को लेकर कोई नई बात सामने आती है, तो कुछ समय के लिए उम्मीद जगती है. सोशल मीडिया पर बहस शुरू होती है, लोग सवाल पूछते हैं, पुराने दावे और पुराने सवाल फिर सामने आते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद सबकुछ बिना किसी मुकाम पर पहुंचे शांत हो जाता है और सपने टूट जाते हैं. पीछे रह जाता है वही टूटा हुआ पिता, वही कमरा, वही तन्हाई और बेटे की यादें.
मामा भूपेंद्र सिंह का छलका दर्द: ‘परिवार को बस सच चाहिए’
भूपेंद्र कुमार सिंह कहते हैं कि उन्हें मालूम है कि इंसान वापस नहीं आ सकता, पर ऐसी खबर सामने आने पर उम्मीद जरूर जगती है. उनके भांजे ‘गुलशन’ अब लौटकर नहीं आएगा, लेकिन परिवार को यह संतुष्टि तो मिलनी ही चाहिए कि आखिर उसके साथ क्या हुआ था. यह कहते-कहते भूपेंद्र सिंह भावुक हो जाते हैं. फोन पर उनकी आवाज भर्रा जाती है और वह फूट-फूटकर रो पड़ते हैं.
उनका दर्द सिर्फ भांजे को खोने का नहीं है. उन्होंने सुशांत को बचपन से अपनी आंखों के सामने बड़ा होते देखा था. उसके साथ वक्त बिताया था और बातचीत होती थी. मुंबई में रहते हुए भी वह उसे खगड़िया स्थित अपने गांव आने के लिए कहते थे. सुशांत भी परिवार से जुड़े रहते थे और अपनी मौत से करीब दो महीने पहले वह अपने ननिहाल खगड़िया भी गए थे. परिवार के साथ बिताए उस मुलाकात की याद आज भी भूपेंद्र सिंह के पास है. शायद इसीलिए सुशांत से जुड़ी कोई भी नई खबर उनके लिए सिर्फ खबर नहीं होती, वह सुशांत की याद होती है और सबकुछ पुराने जख्म के ताजा होने जैसा लगता है.
फैंस से मार्मिक अपील: ‘पिता को परेशान न करें, उनके लिए वह सिर्फ गुलशन है’
भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि जब कोई बार-बार सुशांत की मौत को लेकर सवाल करता है या कोई नई चर्चा शुरू होती है, तो कई बार ऐसा लगता है जैसे पुराने जख्म फिर ताजा हो गए. सुशांत के जाने के बाद उनके पिता ने खुद को लगभग घर तक सीमित कर लिया है. अब उन्हें चलने-फिरने में भी परेशानी होती है, तबीयत नासाज रहती है और बाहरी दुनिया से उनका रिश्ता लगभग खत्म हो चुका है.
भूपेंद्र सिंह ने सुशांत के फैंस से एक मार्मिक गुजारिश भी की है. वह कहते हैं कि लोग आज भी सुशांत के पटना स्थित घर आते हैं, उसकी गाड़ी के सामने खड़े होकर तस्वीरें लेते हैं. उनके फैंस के लिए शायद यह अपने पसंदीदा स्टार के करीब होने का एक पल है, लेकिन परिवार के लिए यह एक दर्द है. इसलिए परिवार की उनसे एक ही गुजारिश है कि आप आएं जरूर, पर सुशांत सिंह राजपूत के पिता को परेशान न करें. उनके सामने सुशांत की चर्चा न करें, क्योंकि जिसे दुनिया सुशांत सिंह राजपूत के नाम से जानती है, वह उस घर में आज भी सिर्फ ‘गुलशन’ है – एक बेटा, एक इकलौता बेटा.
सोशल मीडिया पर वायरल कोई वीडियो कुछ दिनों की चर्चा हो सकता है, उस पर बहस हो सकती है, लोग अपनी-अपनी राय रख सकते हैं. लेकिन पटना के उस घर में ऐसी हर खबर का असर अलग है. वहां एक टूटा हुआ बुजुर्ग पिता बैठा है, जिसने अपने इकलौते बेटे को खोया है और बेटे की याद में पत्नी के जाने का दर्द सहा है. वह पिता अब बेटे के लौटने की उम्मीद नहीं करता. उसे पता है कि उनका ‘गुलशन’ दरवाजा खोलकर वापस नहीं आएगा. लेकिन शायद दिल के किसी कोने में यह इंतजार अब भी बचा है कि एक दिन कोई ऐसी खबर जरूर आएगी, जिसे सुनकर वह कह सकेंगे कि अब कुछ सवालों के जवाब मिल गए. अब उन्हें बेटा नहीं चाहिए, अब उन्हें सिर्फ सच चाहिए. ऐसा सच, जो शायद उस पिता की छह साल लंबी तन्हाई में पहली बार थोड़ा-सा सुकून भर सके.







