Bihar Technical Education: बिहार सरकार तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। राज्य के 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों और 46 पॉलिटेक्निक संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को अब जर्मन, फ्रेंच और जापानी जैसी विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को रोजगार के बेहतर अवसर दिलाना और उन्हें विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए तैयार करना है। इसके साथ ही, अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च फंड में भी दस गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव है।
रिसर्च फंड में 10 गुना बढ़ोतरी का प्रस्ताव
तकनीकी संस्थानों में शोध को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अनुसार, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के लिए उपलब्ध रिसर्च फंड को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये करने की योजना है। वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट में भेजा जाएगा। विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी ने शनिवार को पॉलिटेक्निक संस्थानों के प्राचार्यों के साथ समीक्षा बैठक के बाद इन बदलावों की घोषणा की। इस बढ़ी हुई राशि से संस्थानों को उभरते क्षेत्रों में शोध परियोजनाएं शुरू करने और अनुसंधान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

AI, रोबोटिक्स और विदेशी भाषाओं पर जोर
राज्य सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस, जीआईएस, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और प्रशिक्षण का विस्तार करने की योजना बना रही है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की गई है, जिसमें शोध, बुनियादी ढांचे का विकास और नए पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसका उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को उभरती प्रौद्योगिकियों और उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के साथ जोड़ना है। जर्मन, फ्रेंच और जापानी भाषा के पाठ्यक्रम छात्रों को उनकी तकनीकी योग्यता के साथ एक अतिरिक्त कौशल प्रदान करेंगे, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय रोजगार और वैश्विक उद्योगों के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकें। छात्रों को प्रौद्योगिकी, शिक्षा और उद्योग में नवीनतम विकास से अवगत कराने के लिए एक्सपोजर विजिट भी कराए जाएंगे।
नए विश्वविद्यालय और वैश्विक साझेदारी
बिहार में दो विशेषीकृत विश्वविद्यालयों की स्थापना की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जिनमें मुजफ्फरपुर में शहीद जुब्बा सहनी वास्तुकला एवं सिविल विश्वविद्यालय और भागलपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं कंप्यूटर विज्ञान विश्वविद्यालय शामिल हैं। ये विश्वविद्यालय वास्तुकला, सिविल इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर विज्ञान में विशेष शिक्षा के अवसरों का विस्तार करेंगे। इसके अलावा, राज्य ने पूर्णिया, मोतिहारी और जमुई में तारामंडल स्थापित करने के प्रस्ताव केंद्र को भेजे हैं। रिमोट सेंसिंग, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष नीति जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
विभाग ने बताया कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलिटेक्निक संस्थानों ने लगभग 98% प्रवेश लक्ष्य हासिल किया है। राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NBA) से 11 सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों के 20 कार्यक्रमों को पहले ही मान्यता मिल चुकी है, जबकि 32 पॉलिटेक्निक संस्थानों के 42 कार्यक्रमों के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया जारी है। सरकार गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की भी तैयारी कर रही है, ताकि तकनीकी संस्थानों के शिक्षकों को AI-केंद्रित प्रशिक्षण मिल सके और AI-आधारित पाठ्यक्रम विकसित किए जा सकें।
छात्रों के लिए आवास की कमी को दूर करने के लिए, जहां छात्रावास उपलब्ध नहीं हैं, वहां उपयुक्त भवनों को किराए पर लेकर व्यवस्था की जाएगी। बीईएलट्रॉन के माध्यम से युवा पेशेवरों की भर्ती कर तकनीकी संस्थानों में मानव संसाधन को मजबूत किया जाएगा। मधुबनी पॉलिटेक्निक ने 100% प्लेसमेंट हासिल किया है, और अब अन्य संस्थानों में भी प्लेसमेंट प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए मिशन-मोड दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। इन व्यापक प्रयासों से बिहार की तकनीकी शिक्षा प्रणाली को तेजी से बदलते वैश्विक रोजगार बाजार की मांगों के अनुरूप बनाया जा रहा है।







