Bihar Election Commission: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद ने अब एक नया और सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिससे Bihar की राजनीति में हड़कंप मच गया है।
उन्होंने कहा है कि अगर संविधान उन्हें एक खून माफ करने की इजाजत दे, तो वह ज्ञानेश कुमार को गोली मार देंगे। यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बीच आया है।
मुकेश सहनी ने क्यों कही इतनी बड़ी बात?
मतदाताओं के अपमान और जनादेश की चोरी का आरोप लगाते हुए, मुकेश सहनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश में जिस तरह जनता के मत को चुराया जा रहा है और जनादेश को फर्जी तरीके से दूसरे पक्ष में भेजा जा रहा है, उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भाजपा के लिए काम करने और फर्जीवाड़े से सरकार बनाने का आरोप लगाया। सहनी ने कहा,
‘आज यह स्पष्ट हो चुका है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार वो बीजेपी के लिए काम कर रहे हैं और फर्जीवाड़ा कर के सरकार बना रहे हैं। तो ऐसे जगह पर हमने कहा कि अगर हमको एक खून, अगर देश का संविधान इजाजत दे तो एक खून अगर हमको माफ हो तो हम ज्ञानेश कुमार को गोली मार देंगे। क्यों? क्योंकि यह देश किसी के बाप का नहीं है। इस देश को आजादी दिलाने के लिए हमारे पूर्वज शहीद हुए हैं। आज भगत सिंह ने सबकुछ देश को बनाने के लिए किया है।’
उन्होंने आगे कहा कि अगर ईडी, सीबीआई और सेना के इस्तेमाल से वोट काटकर चुनाव जीतने हैं, तो फिर चुनाव ही नहीं कराए जाने चाहिए। सहनी ने बिहार में आचार संहिता के बावजूद चुनाव के बीच पैसे बांटने और बंगाल में सेना उतारकर लाखों वोट काटने का आरोप भी लगाया।
विपक्षी दलों ने भी घेरा, की ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला करने वालों में मुकेश सहनी अकेले नहीं हैं। गुरुवार को भारतीय युवा कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन नागरिक याचिका शुरू की है। संगठन ने चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए युवाओं और नागरिकों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की है। युवा कांग्रेस ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:
- ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाना
- उनकी गिरफ्तारी और अभियोजन
- मतदाता सूची समेत पूरी ‘वोट चेन’ और चुनावी प्रक्रिया की व्यापक जांच
- कथित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संबंधों की जांच
- सभी चुनावी रिकॉर्ड और आंतरिक आपत्तियों को सार्वजनिक करना
इससे पहले बुधवार को भी विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे ‘देशद्रोह का कृत्य’ बताया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लोकतंत्र पर सरकार के कब्जे का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री से जवाब मांगा। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने की अपील की, जबकि दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने एसआईआर को तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले आयोग चला रहे हैं।
निर्वाचन आयोग और भाजपा का पलटवार
विपक्ष के आरोपों को भाजपा ने सिरे से खारिज कर दिया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाएं लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रही हैं। उन्होंने आयोग और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों पर कहा कि ‘विचारों का आदान-प्रदान मजबूत लोकतंत्र का प्रतीक है’, और विपक्ष अपने ही जाल में फंस गया है।
निर्वाचन आयोग ने भी इन आरोपों पर सफाई दी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी फैसले सर्वसम्मति से हो रहे हैं और वैचारिक मतभेद को टकराव नहीं समझा जाना चाहिए। आयोग ने बताया कि पिछले दस महीनों में उसने 40 नई पहलें की हैं और देशभर में मतदाता सूची संशोधन सहित कई चुनावी सुधार किए हैं। आयोग के अनुसार, ये सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।








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