SIR Controversy: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग रिपोर्टर (SIR) से जुड़ा विवाद अब राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है। इस मामले पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर से ही चुनाव आयोग (EC) से स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठने लगी है। बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख घटक दलों में से एक लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान के बाद अब राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने भी आयोग से इस पर जवाब मांगा है।
उपेंद्र कुशवाहा ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि SIR से जुड़े इस विवाद के कारण आम जनता में काफी उलझन पैदा हो गई है। कुशवाहा ने जोर देते हुए कहा कि इस मुद्दे को तुरंत सुलझाना आवश्यक है, ताकि लोगों का भ्रम दूर हो सके। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वह बिना किसी देरी के इस पूरे प्रकरण पर अपना स्पष्टीकरण जारी करे।
मतदाता सूची पर भारी विवाद: चुनाव आयोग के अंदर ही फूट, उपेंद्र कुशवाहा का बड़ा बयान!
Bihar Voter List: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक गलियारों से आगे निकलकर चुनाव आयोग के भीतर तक पहुँच गया है। इस प्रक्रिया पर खुद चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति उठाई थी, जिससे हड़कंप मच गया है। अब राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इस पूरे मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति स्पष्ट करने और जांच की मांग की है।
चुनाव आयोग के भीतर 14 आपत्तियां
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान कई मामलों में प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने ERONET डेटाबेस को केंद्रीकृत करने, नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में बदलाव और SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने जैसे निर्णयों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। बताया गया है कि इस अवधि में कुल 14 आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जिससे आयोग के भीतर ही प्रक्रिया को लेकर मतभेद सामने आए।
आयोग ने दी सफाई, कुशवाहा ने की जांच की मांग
रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि किसी भी बड़े संस्थान में निर्णय लेने से पहले अलग-अलग राय, सवाल और सुझाव आना एक सामान्य प्रक्रिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, किसी अधिकारी या चुनाव आयुक्त की ओर से किसी मुद्दे पर अलग राय सामने आने का यह अर्थ नहीं है कि वही आयोग का अंतिम फैसला है। आयोग ने यह भी दावा किया कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से हुए हैं।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘किसी मुद्दे पर राजनीतिक दलों की राय अलग होना सामान्य है। लेकिन इस मामले में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह उचित नहीं है। जिस स्तर पर किसी मामले की जांच या पड़ताल करने का अधिकार है, वहीं से इसकी जांच होनी चाहिए।’
मतदाताओं के लिए स्थिति स्पष्ट होना जरूरी
SIR का सीधा संबंध मतदाताओं के अधिकारों और उनकी सूची की शुद्धता से है। ऐसे में चुनाव आयोग के भीतर से ही प्रक्रिया पर सवाल उठना और फिर आयोग द्वारा सफाई दिया जाना, पूरे मामले को और भी गंभीर बना देता है। एक तरफ चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी तरफ आयोग इसे सर्वसम्मत निर्णय बता रहा है। आम मतदाताओं के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि किन मुद्दों पर सवाल उठे थे और अंतिम निर्णय किस आधार पर लिए गए। इस पूरे विवाद में पारदर्शिता और स्पष्टता बेहद जरूरी है, ताकि मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनी रहे।
NDA के भीतर से उठ रहे सवाल
उपेंद्र कुशवाहा से पहले केंद्र सरकार में मंत्री और भाजपा के सहयोगी चिराग पासवान भी चुनाव आयोग से ऐसी ही मांग कर चुके हैं। चिराग पासवान ने कहा था कि चुनाव आयोग को आगे आकर जनता की आशंकाओं का समाधान करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को ज्यादा महत्व नहीं दिया था। चिराग ने यह भी साफ किया था कि सरकार का हिस्सा होने का मतलब यह नहीं है कि वह हर हाल में किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करेंगे।
कुशवाहा के रुख में आया बड़ा बदलाव
यह दिलचस्प है कि एक दिन पहले तक उपेंद्र कुशवाहा इस SIR विवाद पर बोलने से बच रहे थे। गुरुवार को पटना में जब मीडियाकर्मियों ने उनसे इस विवाद के संबंध में सवाल किया था, तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। तब उन्होंने कहा था कि यह चुनाव आयोग का आंतरिक मामला है और दो लोगों के बीच मतभेद होना कोई अस्वाभाविक बात नहीं है। महज एक दिन के भीतर उनके रुख में आए इस बदलाव की सियासी हलकों में काफी चर्चा हो रही है, जिससे बिहार की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें लगाई जा रही हैं।
कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर कहा, “SIR से जुड़े विवाद के कारण आम जनता में काफी उलझन पैदा हो गई है। इस मुद्दे को तुरंत एड्रेस करने की जरूरत है, ताकि लोगों का कंफ्यूजन दूर हो सके। चुनाव आयोग से अपील है कि वह बिना किसी देरी के इस पर अपना स्पष्टीकरण दे।”
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग के भीतर का यह विवाद अब NDA के लिए भी एक चुनौती बन गया है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग इस मामले पर कब और क्या स्पष्टीकरण देता है, और इसका राजनीतिक असर क्या होता है।







