Bihar CM POCSO: बिहार की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की वरिष्ठ नेता मीसा भारती ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इस मांग को लेकर मीसा भारती ने पटना के सचिवालय थाने में जमकर धरना दिया। उनका आरोप है कि जमुई में एक पीड़िता की पहचान सार्वजनिक की गई है, जिसके लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं।
मीसा भारती ने इस मामले को बेहद गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार बेटियों की सुरक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री की ओर से ही पीड़िता की पहचान उजागर की जा रही है। उन्होंने मांग की कि इस संवेदनशील मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तुरंत पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। इस विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य में राजनीतिक पारा और चढ़ गया है।

सीएम सम्राट चौधरी पर क्यों FIR की मांग?
जमुई में एक आपराधिक मामले की पीड़िता की पहचान उजागर होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई थी। मीसा भारती ने इसी मुद्दे को उठाते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा है। पॉक्सो एक्ट के तहत किसी भी यौन उत्पीड़न पीड़िता की पहचान उजागर करना दंडनीय अपराध है। मीसा भारती का आरोप है कि मुख्यमंत्री के स्तर पर इस नियम का उल्लंघन हुआ है।
मीसा भारती ने आरोप लगाया, ‘मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमुई पीड़िता की पहचान उजागर की है, जो पॉक्सो एक्ट का सीधा उल्लंघन है। हम मांग करते हैं कि उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई हो।’
बिहार में बेटियों के मामलों पर गरमाई सियासत
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार में बेटियों से जुड़े कई संवेदनशील मामले सुर्खियों में हैं। जमुई के अलावा, समस्तीपुर, बांका और किशनगंज से भी ऐसे वीडियो वायरल होने की खबरें आई हैं। विपक्षी दल लगातार सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर हमलावर हैं। मीसा भारती का यह धरना सीधे तौर पर सरकार को घेरने और मुख्यमंत्री को जवाबदेह ठहराने की कोशिश है।
इस मामले पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी या सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, आरजेडी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे और न्याय मिलने तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे। आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की राजनीति में और गरमा सकता है, खासकर जब विपक्षी दल इसे एक बड़े राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

