Bihar Leather Industry: बिहार के फुटवियर और लेदर उत्पाद उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल की है। मुजफ्फरपुर के महवल में हाल ही में मेगा लेदर, फुटवियर एंड एक्सेसरीज पार्क का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (FDDI) पटना और बिहार सरकार के उद्योग विभाग के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए।
इस ऐतिहासिक पल के साक्षी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह भी बने। इस समझौते पर FDDI के प्रबंध निदेशक विवेक शर्मा (IRS) और बिहार सरकार के उद्योग निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता (IAS) ने हस्ताक्षर किए। FDDI पटना के कार्यकारी निदेशक नीरज कुमार भी इस अवसर पर मौजूद रहे। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य राज्य में लेदर और फुटवियर उद्योग से जुड़े उद्यमों को तकनीकी सहयोग देना और कौशल विकास को गति प्रदान करना है।
तकनीकी सहयोग और कौशल उन्नयन से बदलेगी तस्वीर
इस समझौते के तहत, FDDI बिहार सरकार के लिए एक ज्ञान और तकनीकी साझेदार की भूमिका निभाएगा। संस्थान राज्य के लेदर और फुटवियर क्लस्टरों में साझा सुविधा सेवाओं को मजबूत करने में मदद करेगा। इसके साथ ही, यह तकनीकी सहायता, कौशल विकास और क्षमता निर्माण में भी महत्वपूर्ण सहयोग देगा।
उद्योग से जुड़े लोगों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। इससे स्थानीय उद्योगों को बेहतर तकनीक अपनाने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और अपने उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।
FDDI के प्रबंध निदेशक विवेक शर्मा (IRS) और बिहार सरकार के उद्योग निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता (IAS) ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो राज्य में औद्योगिक विकास की नई राह खोलेगा।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बनाएगा बिहार
इस पहल से बिहार में फुटवियर और लेदर उत्पादों के निर्माण, कौशल प्रशिक्षण और उद्यम विकास को एक नई गति मिलेगी। स्थानीय उद्योगों को बेहतर तकनीक और सुविधाएं मिलने से प्रशिक्षित मानव संसाधन भी तैयार हो सकेंगे। राज्य में चमड़ा और फुटवियर क्षेत्र से जुड़े उद्यमों को तकनीकी मार्गदर्शन और साझा सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जिससे उनके उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यह बिहार के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बनाने के अवसर प्रदान करेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा।







