Bihar Inflation: त्योहारी सीजन से ठीक पहले महंगाई का डबल अटैक आम आदमी की खुशियों पर भारी पड़ रहा है। चीनी, दाल, सरसों तेल और चना के दामों में अप्रत्याशित उछाल ने रसोई का पूरा बजट बिगाड़ दिया है। दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के मद्देनजर खाद्य पदार्थों की कीमतों में आई यह तेजी मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए चुनौती बन गई है, जिससे अब मेहमाननवाजी पर भी भारी खर्च करना पड़ रहा है।
मिठास हुई कड़वी, चीनी के दाम आसमान पर
बाजार में चीनी की कीमतों में आए उछाल ने लोगों के मुंह का जायका कड़वा कर दिया है। थोक मंडी में चीनी लगभग 60 रुपये प्रति किलो मिल रही है, वहीं खुदरा बाजार में यह 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। मिठाइयों और पकवानों की तैयारी अब पहले से कहीं ज्यादा महंगी हो गई है। भागलपुर थोक मंडी के व्यवसायी मनीष कुमार ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की।
‘त्योहारों के समय मांग बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन इस बार पीछे से ही माल महंगा आ रहा है। सावन के महीने में भी चीनी के तेवर कड़े थे, और अब त्योहारी सीजन में आपूर्ति प्रभावित होने और लागत बढ़ने के कारण चीनी का थोक भाव 60 रुपये तक पहुंच गया है। जब हमें ही माल महंगा मिलेगा, तो खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ना तय है। दाल और सरसों तेल के दामों में भी तेजी के संकेत हैं, जिससे बाजार में खरीदार बजट संभालकर चल रहे हैं।’
दाल और तेल भी हुए महंगे, आमदनी पर भारी बोझ
चीनी के साथ-साथ दाल, सरसों तेल और चना के भाव में भी लगातार तेजी देखी जा रही है। सभी दलहन की कीमतों में 5 से 6 रुपये प्रति किलो का उछाल आया है, जिससे आम उपभोक्ताओं की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। थोक बाजार और खुदरा बाजार के बीच कीमतों में बड़ा अंतर होने से इसका सीधा बोझ उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
बिगड़ा रसोई का बजट, गृहणियों की बढ़ी चिंता
महंगाई की इस मार से घर का पूरा बजट तहस-नहस हो गया है। गृहिणी सरस्वती पांडे ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि त्योहारों में मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन अब चाय-पानी की पारंपरिक मेहमाननवाजी पर भी भारी खर्च बैठ रहा है। हालात ये हैं कि सुबह की बेड टी में कटौती करनी पड़ रही है।
‘महंगाई ने घर का पूरा बजट तहस-नहस कर दिया है। त्योहारों में मेहमानों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन अब चाय-पानी की पारंपरिक मेहमाननवाजी पर भी भारी खर्च बैठ रहा है। हालात ये हैं कि सुबह की बेड टी में कटौती करनी पड़ रही है। चीनी, दाल और तेल जैसी बुनियादी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। पहले से ही मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए रसोई चलाना चुनौतीपूर्ण था, अब त्योहारों की खुशी मनाने के लिए भी हर एक रुपये का हिसाब लगाना मजबूरी बन गया है।’
दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले खाद्य पदार्थों के दामों में आई यह तेजी घरेलू बजट पर भारी दबाव बना रही है। त्योहारी सीजन में खानपान से लेकर घरेलू खर्च वैसे ही बढ़ जाते हैं; ऐसे में आम जनता के बीच अब यही बड़ा सवाल तैर रहा है कि बाजार की इस बेलगाम महंगाई पर प्रशासन कब लगाम लगाएगा और आम लोगों को राहत कब मिलेगी।







