Bhagalpur Salary Scam: बिहार के भागलपुर जिले में शिक्षा विभाग ने एक बड़े वेतन घोटाले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। फर्जी विशिष्ट शिक्षिका तनुश्री के नाम पर एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल के माध्यम से 98.12 लाख रुपये के अवैध वेतन भुगतान और गबन के सनसनीखेज मामले में दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से जिले के शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी की विस्तृत रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग ने यह अहम फैसला लिया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) चंदन कुमार और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) स्थापना शशि चंदन को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। यह कदम सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता के खिलाफ सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति को दर्शाता है।
फर्जी शिक्षिका के नाम पर करोड़ों का खेल
यह पूरा मामला फर्जी शिक्षिका तनुश्री से जुड़ा है, जिसके नाम पर लंबे समय से एचआरएमएस पोर्टल का दुरुपयोग करते हुए वेतन का अवैध भुगतान किया जा रहा था। इस घोटाले की कुल राशि 98 लाख 12 हजार रुपये आंकी गई है, जो सरकारी खजाने को चूना लगाने का एक बड़ा उदाहरण है। शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
DM की रिपोर्ट बनी कार्रवाई का आधार
इस बड़े घोटाले का खुलासा जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट के बाद हुआ। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से वित्तीय अनियमितताओं और अधिकारियों की संलिप्तता का जिक्र था, जिसके आधार पर शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई की। DEO चंदन कुमार और DPO स्थापना शशि चंदन का निलंबन यह संदेश देता है कि सरकारी योजनाओं और पोर्टल का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा विभाग ने फर्जी शिक्षिका के नाम पर HRMS पोर्टल से हुए 98.12 लाख रुपये के अवैध वेतन भुगतान और गबन मामले में DEO चंदन कुमार और DPO स्थापना शशि चंदन को निलंबित किया है। जिलाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर यह सख्त कार्रवाई की गई है।
शिक्षा विभाग में बढ़ी सख्ती
यह निलंबन शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखी जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इस घटना के बाद, अन्य अधिकारियों को भी सतर्क रहने का स्पष्ट संकेत मिला है, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।







