Bihar Liquor Smuggling: शराबबंदी वाले बिहार में शराब तस्कर लगातार नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं। अब ‘मॉडल जैसी’ दिखने वाली युवतियों और ‘किराए के पति’ व ‘उधार के बच्चों’ का इस्तेमाल कर पुलिस को चकमा देने की कोशिशें सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में समस्तीपुर पुलिस ने शुक्रवार को शराब की बड़ी खेप के साथ एक युवती नेहा झा और उसके रिश्तेदार ईशान कुमार को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी बिहार में शराब तस्करी के बदलते तौर-तरीकों को उजागर करती है, जहां अब महिलाएं और युवा भी इस गोरखधंधे का हिस्सा बन रहे हैं।
समस्तीपुर में ‘मॉडल’ युवती के साथ पकड़ी गई 75 लीटर शराब
समस्तीपुर जीआरपी को 4 सितंबर को गुप्त सूचना मिली थी कि स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से दिल्ली से बिहार में शराब की बड़ी खेप लाई जा रही है। सूचना के आधार पर, ट्रेन के समस्तीपुर पहुंचते ही पुलिस ने चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान ट्रेन के एसी-1 कोच से लगभग 75 लीटर विदेशी शराब बरामद की गई। पुलिस ने शराब के साथ नेहा झा और उसकी बड़ी बहन अंशु झा के देवर ईशान कुमार को गिरफ्तार कर लिया। ये दोनों नई दिल्ली से जयनगर जा रहे थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, नेहा यह शराब अपने कथित ‘परमानेंट कस्टमर’ के लिए ला रही थी। अब समस्तीपुर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह शराब किन लोगों तक पहुंचाई जानी थी और नेहा का नेटवर्क कितना बड़ा है।

शराब तस्करी में परिवार का कनेक्शन और पुराना रिकॉर्ड
गिरफ्तार नेहा झा समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर सिंघिया थाना क्षेत्र के बारी गांव के वार्ड-12 की रहने वाली बताई गई है। उसके पिता का नाम संजय कुमार झा और मां का नाम पुनीता झा है, जो आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका हैं। पिता पंकज झा पहले ही शराबखोरी-तस्करी में जेल जा चुके हैं। नेहा के दादा शशिभूषण झा बारी पंचायत के पैक्स अध्यक्ष रह चुके हैं। चार बहनों में नेहा सबसे छोटी है। चौंकाने वाली बात यह है कि नेहा की दूसरी बहन निशु झा को दरभंगा पुलिस शराब तस्करी के आरोप में पहले भी दो बार गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस अब इस पहलू की भी गहनता से जांच कर रही है कि क्या इन दोनों मामलों के बीच कोई सीधा संबंध है और नेहा के परिवार के अन्य सदस्यों का भी इस धंधे में कोई हाथ है।
मोतिहारी में भी सामने आया था ‘किराए के पति’ और ‘उधार के बच्चों’ का चौंकाने वाला तरीका
यह पहला मामला नहीं है जब बिहार में शराब तस्करी के लिए महिलाओं का इस्तेमाल सामने आया हो। इसी साल जुलाई में मोतिहारी पुलिस ने भी एक लग्जरी कार से शराब की बड़ी खेप लाने के आरोप में कुछ महिलाओं को गिरफ्तार किया था। उस दौरान एक महिला तस्कर ने उत्पाद विभाग की टीम के सामने कई हैरतअंगेज खुलासे किए थे।
महिला ने बताया था कि कार चला रहा व्यक्ति उसका असली पति नहीं, बल्कि ‘किराए का पति’ था। पुलिस की नजर से बचने के लिए उसे पति के तौर पर साथ रखा गया था। तस्करी के दौरान परिवार जैसा माहौल दिखाने के लिए 1,500 रुपये प्रतिदिन पर ‘किराए का पति’ और 500 रुपये में ‘बच्चा’ लिया गया था। ये तीनों अलग-अलग जगहों के रहने वाले थे और शराब की खेप पहुंचाने के लिए ही एक साथ सफर कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, वह महिला उत्तर प्रदेश से अवैध शराब की बड़ी खेप लेकर मुजफ्फरपुर जा रही थी।
पुलिस की बढ़ती चौकसी के बावजूद, तस्कर लगातार नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। महिलाओं और युवतियों का इस्तेमाल, खासकर ऐसी ‘मॉडल जैसी’ पर्सनैलिटी वाली लड़कियों का, जिन पर पहली नजर में शक कम हो, एक नई चुनौती पेश कर रहा है। मोतिहारी और समस्तीपुर की ये गिरफ्तारियां दिखाती हैं कि शराबबंदी को सफल बनाने के लिए पुलिस को अब इन नए और शातिर तरीकों से निपटने की रणनीति बनानी होगी।







