Bihar Dustbin Scam: बिहार में डस्टबिन खरीद को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें राजद सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार पर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। रविवार को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, सुधाकर सिंह ने दावा किया कि इस खरीद प्रक्रिया में लगभग 275 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। उन्होंने इस दौरान एक डस्टबिन भी प्रदर्शित किया और इसकी खरीद मूल्य पर सवाल उठाए।

सांसद सुधाकर सिंह ने बताया कि जिस प्लास्टिक डस्टबिन की बाजार कीमत करीब 8 से 10 रुपये प्रति पीस है, उसे सरकारी स्तर पर 100 रुपये से अधिक में खरीदा गया है। उन्होंने डस्टबिन की क्षमता को लेकर भी सवाल उठाया, जिसमें पानी भरकर जांचने पर इसकी क्षमता लगभग 60 लीटर पाई गई। उनके अनुसार, यह केवल एक सामान की खरीद का मामला नहीं है, बल्कि पूरी खरीद प्रक्रिया की गहन जांच होनी चाहिए।
डस्टबिन की कीमत और खरीद प्रक्रिया पर सवाल
सुधाकर सिंह ने डस्टबिन खरीद में हुए भारी मूल्य अंतर पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाजार में आसानी से उपलब्ध होने वाले डस्टबिन को सरकारी खरीद में कई गुना अधिक दाम पर खरीदा गया। इस कीमत के अंतर को उन्होंने विवाद का मुख्य बिंदु बताया। सांसद ने टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि निगम अपने स्तर पर खरीद से जुड़े फैसले लेता है, जिसमें टेंडर कमेटी और प्रबंध निदेशक की भूमिका संदिग्ध है।
“बाढ़ आने के पहले कुंभकर्णी निद्रा में सोयी रहती है बिहार की सरकार ..!”
सुधाकर सिंह ने अधिकारियों की नियुक्ति और निर्णय प्रक्रिया का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि संबंधित पदों पर नियुक्तियों में सरकार की भूमिका रहती है और इस पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने बिहार में विकास आयुक्त की भूमिका को भी कमजोर बताया और इस खरीद में उनकी भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगाया।
तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय भी घेरे में
राजद सांसद ने इस पूरे मामले में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 10 लाख रुपये से अधिक की खरीद के लिए विभागीय मंत्री की मंजूरी आवश्यक होती है। उनके मुताबिक, इस मामले की फाइल तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के पास भी गई थी। सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि इस मामले में मंगल पांडेय की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि पूर्व मंत्री को बचाने के लिए दूसरे नेताओं द्वारा बयान दिए जा रहे हैं। सांसद ने कुल 305 करोड़ रुपये के बजट का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इस राशि में से लगभग 90 प्रतिशत यानी 275 करोड़ रुपये की अनियमितता हुई है। उनके अनुसार, अस्पतालों के लिए वास्तविक सामान की खरीद पर केवल 25 से 30 करोड़ रुपये ही खर्च हुए, जबकि बाकी राशि में कथित घोटाला किया गया।
मुख्यमंत्री कार्यालय और अधिकारियों की भूमिका पर प्रश्न
सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री कार्यालय को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने खरीद प्रक्रिया से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की जांच की मांग की। सांसद ने अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग उठाई और कहा कि इस मामले में उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि दोषी व्यक्तियों को सामने लाया जा सके।
इन सभी दावों और आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच या आधिकारिक दस्तावेजों से होना बाकी है। राजद सांसद ने सरकार से इस खरीद प्रक्रिया और टेंडर से जुड़े सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके और जनता को सच्चाई का पता चल सके।








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