Bihar Mid-Day Meal: बेनीपुर के माधोपुर स्थित मध्य विद्यालय में बुधवार को बिहार मिड-डे मील में छिपकली मिलने के बाद हड़कंप मच गया। इस घटना के बाद एक दर्जन से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें तुरंत अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद बच्चों को छुट्टी दे दी गई, लेकिन इस घटना का असर गुरुवार को भी स्कूल में साफ दिखाई दिया। बच्चों में इतना डर बैठ गया कि उन्होंने मिड-डे मील खाने से ही इनकार कर दिया, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहले देशज टाइम्स की ये कवर तस्वीर देखिए : मध्यान्ह भोजन बांटने का इंतजार करती रसोइया और फरार बच्चा।







बच्चों में डर का माहौल, प्रधानाध्यापक की अपील भी बेअसर
बुधवार की घटना के बाद गुरुवार को भी बच्चों में दहशत का माहौल बना रहा। माधोपुर विद्यालय में प्रथम पाली की परीक्षा में 110 बच्चे उपस्थित थे, लेकिन उनमें से केवल 12 बच्चों ने ही मध्याह्न भोजन किया। शेष बच्चों ने खाना खाने से मना कर दिया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार प्रभाकर बच्चों को बार-बार भोजन करने के लिए प्रेरित करते रहे। उन्होंने कहा, ‘डरना नहीं है, मैं भी भोजन किया हूँ, आप लोग भी भोजन कर लें।’ हालांकि, उनकी अपील का बच्चों पर कोई असर नहीं हुआ।

गुरुवार को दोपहर बारह बजे एकता फाउंडेशन द्वारा पका हुआ चावल और मिश्रित दाल विद्यालय पहुंचा। प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार प्रभाकर, एनजीओ के संजीव मिश्रा और अन्य शिक्षकों ने पहले स्वयं थाली में खाना खाया, ताकि बच्चों का विश्वास जीत सकें। इसके बावजूद बच्चे खाना खाने को तैयार नहीं हुए। सिविल सर्जन के आदेश पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहेड़ा के डॉ. कामेश कुमार अपने सहयोगी के साथ विद्यालय पहुंचे और बच्चों व अभिभावकों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली। इस दौरान अभिभावकों ने स्पष्ट कहा:
जब तक भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक वे बच्चों को एमडीएम खाने नहीं देंगे।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस घटना को गंभीर लापरवाही बताते हुए दोषी एजेंसी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रधानाध्यापक ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है और भोजन की जांच के बाद ही वितरण किया जा रहा है।
बार-बार लापरवाही, फिर भी मेहरबान क्यों?
यह पहली बार नहीं है जब एकता फाउंडेशन पर भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। विगत 21 जून 2024 को इसी एनजीओ ने क्षेत्र के करहरी विद्यालय में बच्चों के बीच सड़े हुए अंडे वितरित किए थे। करहरी विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने इस संबंध में शिक्षा विभाग में शिकायत भी की थी। लेकिन, तब की बीईओ इंदू सिंन्हा ने एनजीओ के बजाय प्रधानाध्यापक पर ही कार्रवाई कर दी थी। इस घटना के बाद से क्षेत्र के किसी भी विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने एकता फाउंडेशन के खिलाफ शिकायत करना बंद कर दिया।
लोगों का कहना है कि जब से विद्यालयों में मिड-डे मील का संचालन एनजीओ को मिला है, तब से खाने का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। बुधवार की घटना के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर किसी बच्चे की जान चली जाती, तो इसका दोषी कौन होता – विद्यालय के प्रधानाध्यापक या एनजीओ? प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी रूपेश राय ने कहा है कि मामले की जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद विद्यालय में बच्चों और अभिभावकों का भरोसा बहाल करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।









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