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मैथिल ब्राह्मण समाज की बेटी ने कर दिखाया कमाल! बिहार पुलिस में बनी सिपाही, तोड़ी पुरानी सोच – नाम है प्रतीक्षा

Bihar Police: जाले के रतनपुर गांव की प्रतीक्षा कुमारी ने समाज और परिवार का विरोध झेलकर भी बिहार पुलिस में सफलता पाई। उनकी यह उपलब्धि इलाके की लड़कियों के लिए नई प्रेरणा बन गई है।

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Bihar Police: जाले के रतनपुर गांव की प्रतीक्षा कुमारी ने मैथिल ब्राह्मण समाज की सदियों पुरानी रूढ़िवादी सोच को चुनौती देते हुए बिहार पुलिस में सिपाही बनकर एक नई मिसाल पेश की है। उनकी यह उपलब्धि समाज में महिलाओं के लिए सरकारी सेवा में पहली बड़ी सफलता मानी जा रही है। समाज और परिवार के विरोध के बावजूद, प्रतीक्षा ने यह मुकाम हासिल किया है, और अब उनका अगला लक्ष्य सब-इंस्पेक्टर (एसआई) बनना है। Deshaj Times photo gallery में मां के साथ प्रतीक्षा

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मैथिल ब्राह्मण समाज की बेटी ने कर दिखाया कमाल! बिहार पुलिस में बनी सिपाही, तोड़ी पुरानी सोच - नाम है प्रतीक्षा

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प्रतीक्षा कुमारी के पिता अरुण कुमार रतनपुर गांव के वार्ड-12 में रहते हैं। उनकी छोटी बेटी प्रतीक्षा ने रसायन शास्त्र से एमएससी की डिग्री प्राप्त की है। 30 जून 2025 को उनका चयन बिहार पुलिस में हुआ था। कटिहार में 11 माह 17 दिन का कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, उन्हें पटना पुलिस मुख्यालय में तैनात किया गया है।

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बेटी ने तोड़ी परंपरा! बिहार पुलिस में सिपाही बनी प्रतीक्षा, अब SI बनने का है सपना

Bihar Police: बिहार के जाले प्रखंड स्थित रतनपुर गांव की बेटी प्रतीक्षा कुमारी ने एक ऐसी मिसाल कायम की है, जिसने न सिर्फ अपने मैथिल ब्राह्मण समाज की रूढ़िवादी सोच को तोड़ा है, बल्कि बिहार की लाखों लड़कियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं। रसायन शास्त्र में एमएससी करने के बाद प्रतीक्षा ने बिहार पुलिस में सिपाही का पद हासिल किया है और अब उनका लक्ष्य सब-इंस्पेक्टर बनना है।

प्रतीक्षा कुमारी ने समाज और परिवार के कुछ सदस्यों के विरोध के बावजूद यह उपलब्धि हासिल की। कटिहार में 11 माह 17 दिन का कठिन प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, उनकी पहली तैनाती पटना पुलिस मुख्यालय में हुई है। यह उनके गांव रतनपुर के लिए एक ऐतिहासिक पल है, जहां महिलाओं का सरकारी सेवा में आना, खासकर पुलिस जैसे क्षेत्र में, पहली बार देखा गया है।

मैथिल ब्राह्मण समाज की बेटियों को नई राह

प्रतीक्षा के पिता अरुण कुमार रतनपुर गांव के वार्ड-12 के निवासी हैं। लगभग 11 हजार की आबादी वाले इस गांव में मैथिल ब्राह्मण समाज की संख्या 250 से 300 के करीब है। इस समाज के वयोवृद्ध सदस्य जयचंद कुमार बताते हैं कि उनके लोग पारंपरिक रूप से जीवन यापन करते आए हैं।

जयचंद कुमार के अनुसार, “कुछ पुरुषों ने तो सरकारी व निजी क्षेत्रों में काम किया है, मगर महिलाओं के लिए यह पूरी तरह से नई बात है। किसी बेटी का पुलिस सेवा में जाना पहली बार हुआ है।”

प्रतीक्षा की यह सफलता दर्शाती है कि बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं और हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।

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शिक्षित होकर चुनी पुलिस की राह

प्रतीक्षा ने अपनी पढ़ाई में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उन्होंने वर्ष 2015 में टीबीएस हाई स्कूल, ब्रह्मपुर से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद, 2020 में सीएम साइंस कॉलेज से रसायन शास्त्र में स्नातक और 2022 में प्रथम श्रेणी से एमएससी की डिग्री हासिल की।

उनकी मां और छोटे भाई ने उनके इस साहसिक निर्णय में पूरा सहयोग दिया, जिसके परिणामस्वरूप वह अपनी परीक्षा में सफल हो पाईं। प्रतीक्षा की कहानी उन सभी लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए सामाजिक बाधाओं से जूझ रही हैं।

सिपाही से एसआई बनने का है लक्ष्य

अपनी वर्तमान उपलब्धि से संतुष्ट न होकर, प्रतीक्षा कुमारी ने बड़े सपने देखे हैं। वह पटना पुलिस मुख्यालय में अपनी सेवा के साथ-साथ बिहार पुलिस अवर निरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा की तैयारी भी कर रही हैं।

प्रतीक्षा ने कहा, “मैं अपनी वर्तमान नौकरी से संतुष्ट होकर नहीं रुकी हूं। पटना में सेवा के साथ-साथ मैं बिहार पुलिस अवर निरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा की तैयारी भी कर रही हूं।”

उनका यह दृढ़ संकल्प और आगे बढ़ने की ललक क्षेत्र की अन्य बेटियों को भी सरकारी सेवाओं में आने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित कर रही है। प्रतीक्षा की यह यात्रा बिहार में महिला सशक्तिकरण की एक नई गाथा लिख रही है।

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रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ा

करीब 11 हजार की आबादी वाले रतनपुर गांव में मैथिल ब्राह्मण समाज की संख्या लगभग 250 से 300 के बीच है। समाज के वयोवृद्ध जयचंद कुमार के अनुसार, इस समाज में पुरुष तो सरकारी और निजी क्षेत्रों में कार्यरत रहे हैं, लेकिन महिलाओं के लिए सरकारी नौकरी, खासकर पुलिस सेवा, पूरी तरह से एक नया और अनसुना कदम था। प्रतीक्षा की यह सफलता इस समाज की किसी भी बेटी के लिए पुलिस सेवा में पहला प्रवेश है।

प्रतीक्षा ने बताया कि जब उन्होंने बिहार पुलिस में जाने का फैसला किया, तो परिवार और समाज के कई लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। हालांकि, उन्हें अपनी मां और छोटे भाई का पूरा सहयोग मिला, जिसकी बदौलत उन्होंने परीक्षा दी और सफलता अर्जित की।

शिक्षा का सफर और भविष्य का लक्ष्य

प्रतीक्षा कुमारी ने वर्ष 2015 में टीबीएस हाई स्कूल, ब्रह्मपुर से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। इसके बाद, उन्होंने 2020 में सीएम साइंस कॉलेज से रसायन शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की और 2022 में प्रथम श्रेणी से एमएससी भी पूरी की।

अपनी वर्तमान सिपाही की नौकरी से संतुष्ट न होकर, प्रतीक्षा ने आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प लिया है। पटना में अपनी सेवा के साथ-साथ, वह बिहार पुलिस अवर निरीक्षक (एसआई) भर्ती परीक्षा की तैयारी भी कर रही हैं। उनकी यह यात्रा और सफलता अब क्षेत्र की अन्य बेटियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन रही है, जो उन्हें लीक से हटकर अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

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