Gaya News: विश्व प्रसिद्ध गयाजी पितृपक्ष मेले की तैयारियों को लेकर गया जिला प्रशासन ने लगभग सभी इंतजाम पूरे कर लिए हैं। इस वर्ष 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस महामेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए मोक्षभूमि गया आने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और आवागमन को सुगम बनाने के लिए प्रशासन ने कई आधुनिक और अनूठी पहल की हैं।
लाखों श्रद्धालुओं के लिए खास व्यवस्था, नहीं बिछड़ेंगे बच्चे
जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने मीडिया को बताया कि इस बार प्रशासन का मुख्य ध्यान मेले को पूरी तरह से व्यवस्थित, स्वच्छ और श्रद्धालुओं के अनुकूल बनाने पर है। लाखों की संभावित भीड़ को देखते हुए पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य है कि हर श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपने पितरों का श्राद्ध कर सके और गयाजी की पवित्रता बनी रहे।

जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि हर श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपने पितरों का श्राद्ध कर सके और गयाजी की पवित्रता बनी रहे।”
मेले में बच्चों के बिछड़ने की पुरानी समस्या को देखते हुए इस बार विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने बच्चों को क्यूआर कोड युक्त सुरक्षा बैंड पहनाने का निर्णय लिया है। यह पहल मेले की सबसे चर्चित और आधुनिक व्यवस्थाओं में से एक मानी जा रही है, जिससे अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
QR कोड से तुरंत मिलेंगे बिछड़े बच्चे
इस क्यूआर कोड सुरक्षा बैंड को स्कैन करने पर बच्चे के अभिभावकों की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो जाएगी। इससे बिछड़े हुए बच्चों को उनके परिवार से जल्द से जल्द मिलाया जा सकेगा। यह तकनीक भीड़भाड़ वाले आयोजनों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जिलाधिकारी ने आगे बताया कि सरकार के सभी विभाग, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और स्थानीय नागरिकों के समन्वय से इस पितृपक्ष मेले को सफल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मेले के सुचारु संचालन के लिए कुल 21 कोषांग गठित किए गए हैं। ये कोषांग आवास, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य, बिजली, यातायात, सुरक्षा और प्रचार-प्रसार जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की निगरानी कर रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।







