Bhojpur Flood Relief: आरा: भोजपुर जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। चारों ओर हाहाकार की स्थिति के बीच, ‘लेडी सिंघम’ के नाम से चर्चित रहीं 2019 बैच की पूर्व आईपीएस अधिकारी काम्या मिश्रा बाढ़ पीड़ितों के बीच सहारा बनकर पहुंचीं। उन्होंने खुद अपने हाथों से सैकड़ों प्रभावितों को राहत सामग्री वितरित की, जिससे स्थानीय लोगों में उनके प्रति गहरा सम्मान देखने को मिला।

भोजपुर में ‘लेडी सिंघम’ का जलवा! SP की पत्नी ने बाढ़ पीड़ितों का दिल जीता, खुद उतरकर बांटी राहत
काम्या मिश्रा भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अवधेश दीक्षित की पत्नी हैं। जिले के बड़हरा प्रखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उनकी सक्रियता ने सबको चौंका दिया। उन्होंने नेकनाम टोला, जीवा राय के टोला और सालिग्राम सिंह का टोला जैसे कई गांवों में जाकर लोगों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को समझा। इस दौरान उन्होंने बाढ़ में रह रहे बच्चों के साथ भी संवाद किया और उनके साथ मुस्कुराते हुए तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर सामने आई हैं।
बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आईं ‘लेडी सिंघम’
स्थानीय लोगों ने काम्या मिश्रा के इस सेवा भाव की जमकर सराहना की। एक स्थानीय नागरिक ने कहा,
किसी भी अधिकारी की पत्नी इस तरह लोगों की सेवा करे, ये कम देखने को मिलता है।
काम्या मिश्रा ने इस दौरान अन्य सक्षम लोगों से भी आगे आने और बाढ़ पीड़ितों की मदद करने की अपील की। उनके साथ पुलिस के कुछ जवान भी मौजूद थे, जिन्होंने राहत वितरण कार्य में सहयोग किया। उन्होंने जोर देकर कहा,
ऐसी परिस्थिति में लोगों को आगे आना चाहिए और राहत प्रदान करनी चाहिए।
कौन हैं पूर्व आईपीएस काम्या मिश्रा?
ओडिशा की मूल निवासी काम्या मिश्रा 2019 बैच की आईपीएस अधिकारी रही हैं। शुरुआत में उन्हें हिमाचल प्रदेश कैडर मिला था, लेकिन बाद में उन्हें बिहार कैडर आवंटित किया गया। उनके पति अवधेश दीक्षित वर्तमान में भोजपुर जिले के एसपी के पद पर तैनात हैं। काम्या मिश्रा ने अपनी सेवा के शुरुआती वर्षों, लगभग 2024 में, अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने तब स्पष्ट किया था कि उन पर कोई राजनीतिक या विभागीय दबाव नहीं था। अपने पिता की इकलौती संतान होने के नाते, पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के चलते उन्हें परिवार का बिजनेस (GM Iron and Steel Company) संभालने के लिए यह नौकरी छोड़नी पड़ी थी।
काम्या मिश्रा की यह पहल दिखाती है कि भले ही उन्होंने वर्दी छोड़ दी हो, लेकिन जनसेवा का उनका जज्बा अब भी कायम है। उनकी यह मानवीय सहायता भोजपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उम्मीद की नई किरण लेकर आई है।








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