Bihar Mahagathbandhan Protest: बिहार में मतदाता सूची में कथित बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दल अब सड़क पर उतरने को तैयार हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को महागठबंधन के आंदोलन का पूरा कार्यक्रम घोषित किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इस बड़े Bihar Mahagathbandhan Protest के तहत 7 अक्टूबर को राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर आक्रोश मार्च निकाला जाएगा। इसके अगले दिन 8 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन होगा।
आठ अक्टूबर को राजधानी पटना में महागठबंधन के विधायक, विधान पार्षद और अन्य बड़े नेता लोकभवन की ओर कूच करेंगे। इस मार्च का नेतृत्व स्वयं तेजस्वी यादव करेंगे। महागठबंधन में शामिल सभी दलों के नेता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को बल देना है।
पटना में 8 अक्टूबर को लोकभवन मार्च, तेजस्वी करेंगे नेतृत्व
आंदोलन की शुरुआत 7 अक्टूबर से होगी, जब बिहार के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर विपक्षी दलों के कार्यकर्ता और नेता आक्रोश मार्च निकालेंगे। इसके बाद 8 अक्टूबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर धरना दिया जाएगा। इस तरह, दो दिनों तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विपक्ष का यह बड़ा आंदोलन चलेगा, जो मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों पर केंद्रित है।
दिल्ली में भी इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन, राष्ट्रपति को सौंपेंगे ज्ञापन
तेजस्वी यादव ने बताया कि सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि 6 अक्टूबर को दिल्ली में भी ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसद चुनाव आयोग के सामने मार्च करेंगे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 15 अक्टूबर के बाद विपक्षी दल राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भी सौंपेंगे। तेजस्वी ने इस दौरान कहा कि:
‘अगर लोकतंत्र नहीं बचेगा तो चुनाव कराने का मतलब भी नहीं रहेगा।’
यह बयान लोकतंत्र के भविष्य को लेकर विपक्ष की गंभीर चिंता को दर्शाता है।
मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप, चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
विपक्ष ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। तेजस्वी यादव का आरोप है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सही मतदाताओं के नाम जानबूझकर सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के खिलाफ 14 बार शिकायतें की गईं, लेकिन उन पर कोई सुनवाई नहीं हुई। तेजस्वी ने चुनाव आयोग पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
सोमवार को पटना स्थित अपने आवास पर तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के नेताओं के साथ मिलकर यह प्रेस वार्ता की। इस दौरान कांग्रेस के कपिलदेव प्रसाद यादव, वीआईपी के मुकेश सहनी, भाकपा के रामनरेश पांडेय, भाकपा माले के धीरेंद्र झा, माकपा के अजय कुमार और आईईपी के आईपी गुप्ता सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।
वीआईपी के संस्थापक मुकेश सहनी ने भी इस मौके पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान गरीब, पिछड़े और दलितों के अधिकारों के सबसे बड़े आधार हैं। सहनी ने जोर देकर कहा कि चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं को बिना किसी दबाव के काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बिहार ने हमेशा लोकतंत्र और जन आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुकेश सहनी ने आगे कहा कि आने वाले दिनों में विपक्षी दल जनता और युवाओं के साथ मिलकर एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे। तेजस्वी यादव ने भी स्पष्ट किया कि विपक्ष SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेगा, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।







