Bihar NEET fraud: नीट-यूजी पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़े की जांच में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) को बड़ी सफलता मिली है। बिहार में सॉल्वर गैंग के काम करने के तरीके से जुड़े कई अहम तकनीकी सुराग हाथ लगे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, गिरोह ने प्रत्येक फर्जी परीक्षार्थी के लिए ‘220’ को एक विशेष पहचान या ‘सीक्रेट कोड’ के रूप में तय किया था।
ईओयू की पड़ताल में सामने आया है कि परीक्षा केंद्र पर पहुंचते ही सॉल्वर बायोमीट्रिक डेस्क पर यही कोड बताते थे। इसके बाद पूर्व नियोजित तरीके से उन्हें आगे की प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाता था। इस खुलासे से पूरे रैकेट की कार्यप्रणाली धीरे-धीरे उजागर हो रही है।






‘220’ कोड से ऐसे मिलती थी परीक्षा केंद्रों में एंट्री
आर्थिक अपराध इकाई की जांच में पता चला है कि नीट फर्जीवाड़े में ‘220’ कोड सॉल्वर गैंग का एक महत्वपूर्ण रहस्य था। इसी कोड के आधार पर फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश मिलता था। यह कोड बायोमीट्रिक सत्यापन के दौरान बताया जाता था, जिससे निष्क्रिय बायोमीट्रिक मशीनों का फायदा उठाकर फर्जी प्रवेश प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सके। गैंग के इस संगठित तरीके से परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाई जा रही थी।
अपडेटेड आधार कार्ड से बढ़ी पहचान की चुनौती
इस फर्जीवाड़े में सॉल्वर गैंग ने अपनी पहचान छुपाने के लिए कई चालाकियां कीं। जांच में यह भी सामने आया है कि अपडेटेड आधार कार्ड के इस्तेमाल से सॉल्वरों की पहचान करना और भी मुश्किल हो गया था। तकनीकी खामियों और संगठित गिरोह की मिलीभगत के कारण बायोमीट्रिक सत्यापन जैसी सुरक्षा परतें भी भेद दी गईं। ईओयू अब इन सभी तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच कर रहा है ताकि इस बड़े बिहार नीट फर्जीवाड़ा के सभी दोषियों को बेनकाब किया जा सके।
जांच का अगला कदम और संभावित प्रभाव
आर्थिक अपराध इकाई इस ‘220’ कोड और उसके इस्तेमाल से जुड़े नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है। इस खुलासे से न केवल सॉल्वर गैंग के सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण सबक मिलेंगे। जांच अधिकारी अब उन सभी व्यक्तियों और संस्थानों पर शिकंजा कस रहे हैं, जो इस बड़े फर्जीवाड़े में शामिल थे।








