Bihar Paddy: किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादकता में सुधार लाने के लिए डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विश्वविद्यालय के निदेशक (बीज) डॉ. डी. के. रॉय ने आज अपनी टीम के साथ क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, झंझारपुर स्थित धान अनुसंधान प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने धान की उन्नत किस्मों और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया, जिससे बिहार के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
निरीक्षण के दौरान, डॉ. रॉय ने जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में रोपित सुगंधित धान की उन्नत किस्म ‘राजेन्द्र सरस्वती’ की फसल का जायजा लिया। उन्होंने फसल की वृद्धि, विकास और वर्तमान स्थिति का विस्तृत अवलोकन किया। फसल की समग्र स्थिति संतोषजनक पाए जाने पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की और बेहतर वृद्धि तथा संभावित उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों के समुचित उपयोग पर बल दिया।
मिट्टी का स्वास्थ्य: टिकाऊ खेती की कुंजी
दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता बनाए रखने के लिए मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। डॉ. रॉय ने इस बात पर जोर दिया कि हरी खाद वाली फसलें, जैसे ढैंचा, इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मिट्टी की उर्वरता एवं स्वास्थ्य का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में ढैंचा जैसी हरी खाद वाली फसलों का उपयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हरी खाद से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने, पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार करने तथा मृदा की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है। उन्होंने कृषि उत्पादन के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को भी समान प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
हरी खाद के उपयोग से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार होता है और मृदा की गुणवत्ता बनी रहती है। उन्होंने कृषि उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य को भी उतनी ही प्राथमिकता देने की बात कही।
कम समय, ज्यादा पैदावार: ‘राजेन्द्र सरस्वती’ से किसानों को लाभ
डॉ. डी. के. रॉय ने ‘राजेन्द्र सरस्वती’ धान किस्म की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कम अवधि में तैयार होने वाली एक सुगंधित किस्म है। यह किस्म किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है।
कम अवधि में तैयार होने वाली यह सुगंधित किस्म किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। उचित कृषि प्रबंधन, समयानुकूल देखभाल एवं उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाकर इसकी उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि उचित कृषि प्रबंधन, समय पर देखभाल और उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाकर इसकी उत्पादन क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने धान की उत्पादकता बढ़ाने, उपलब्ध कृषि संसाधनों का दक्षतापूर्वक उपयोग करने तथा वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों को अपनाने पर भी जोर दिया।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, झंझारपुर के प्रभारी पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, फार्म प्रभारी डॉ. एस. के. मंडल, तकनीकी अधिकारी धीरेंद्र कुमार और आशीष राय सहित अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित रहे। यह पहल बिहार में कृषि विकास और किसानों की समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।








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