पटना में ‘जुगनू हाट’ की धूम, बावनबूटी साड़ी-दुपट्टे देख खरीदने को टूट पड़े लोग!
Bihar Jugnu Haat: गर्दनीबाग के बापू टावर में तीन दिवसीय मेले का भव्य आगाज, स्थानीय शिल्पकारों को मिला बड़ा मंच; कैमूर के कालीन और बांका की कलाकृतियां भी बनीं आकर्षण का केंद्र।
Bihar Jugnu Haat: पटना के गर्दनीबाग स्थित बापू टावर में गुरुवार से तीन दिवसीय ‘जुगनू हाट’ का शानदार आगाज हुआ है। इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य बिहार के स्थानीय शिल्पकारों, बुनकरों और पारंपरिक कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करना है, ताकि उनकी कला को नई पहचान मिल सके। यह ‘बिहार जुगनू हाट’ दीपावली, धनतेरस और छठ पर्व से पहले खरीदारी का एक बेहतरीन अवसर लेकर आया है।
धनतेरस से पहले पटना के बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। बोरिंग रोड, डाक बंगला चौराहा, सगुना मोड़ और कदमकुआं समेत शहर के प्रमुख बाजारों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। दिवाली को लेकर दुकानदारों ने भी विशेष तैयारियां की हैं।
कला संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार, पटना डीएम कुंदन कुमार और बापू टावर के निदेशक विनय कुमार ने संयुक्त रूप से फीता काटकर हाट का उद्घाटन किया। इस मेले में बिहार सहित देश के कई हिस्सों से आए हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की बिक्री और प्रदर्शनी लगाई गई है।
इस ‘बिहार जुगनू हाट’ में सबसे ज्यादा चर्चा नालंदा और नवादा की सदियों पुरानी, लुप्त होती ‘बावनबूटी कला’ की हो रही है। इस कला से तैयार की गई खूबसूरत साड़ियां, दुपट्टे और अंगवस्त्रम ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। इनकी बारीकी और पारंपरिक डिज़ाइन लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं।
बावनबूटी कला के साथ ही, मेले में कैमूर के प्रसिद्ध कालीन और बांका की पारंपरिक कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं। आगामी त्योहारों को देखते हुए, यहां सजावट के ढेर सारे उत्पाद उपलब्ध हैं। हस्तशिल्प से तैयार घर और दीवारों को सजाने वाली सामग्री विशेष रूप से पटनावासियों को लुभा रही है।
स्थानीय कला को नई पहचान दिलाने का प्रयास
आयोजक डॉ. स्मृति पासवान ने इस पहल के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा,
‘यह जुगनू हाट स्थानीय कला को नई पहचान दिलाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह नई पीढ़ी को बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से करीब से रूबरू कराने और पटनावासियों के लिए अपनी मिट्टी की कला को जानने का बेहतरीन मौका है।’
उद्घाटन के अवसर पर मलातन इंफ्रा की संस्थापक नूतन पासवान, नरेंद्र पासवान और डीआईजी जयंतकांत सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। मेले में उमड़ी भीड़ और लोगों का उत्साह साफ दर्शाता है कि बिहार की पारंपरिक कला को आज भी बड़े पैमाने पर सराहा और पसंद किया जाता है।
यह ‘बिहार जुगनू हाट’ न केवल कला को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी मदद करेगा। आने वाले दो दिनों में भी यहां बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है, जिससे बिहार की सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प को नया जीवन मिलेगा।
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