Musahari CO: मुजफ्फरपुर के मुशहरी अंचल के निलंबित सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की है। उन पर 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन के कथित फर्जी दाखिल-खारिज मामले में संलिप्तता का गंभीर आरोप है। अहियापुर थाने में सीनियर पुलिस अधिकारी उनसे रिटायर्ड अवर सचिव विजय कुमार की शिकायत पर सवाल-जवाब कर रहे हैं। इस मामले में सीओ सहित कुल आठ लोगों के खिलाफ पहले ही प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।
हालांकि, मुशहरी सीओ को हिरासत में लिए जाने की पुलिस ने अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इस कार्रवाई से जमीन फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसने की उम्मीद जगी है।
रिटायर्ड अवर सचिव की 70 डिसमिल जमीन हड़पने का आरोप
यह पूरा मामला अहियापुर थाना क्षेत्र के शहबाजपुर निवासी विजय कुमार से जुड़ा है। विजय कुमार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार से सेवानिवृत्त अवर सचिव हैं। उनकी शिकायत के अनुसार, उनके पिता जितेंद्र प्रसाद शाही और दादा योगेंद्र प्रसाद शाही के नाम से दर्ज खाता संख्या 53, खेसरा संख्या 403 की 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपने नाम कराने की कोशिश की गई।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि हाजीपुर के सेलमपुर कुचुनदास कोर्ट निवासी कृष्णनंदन पासवान ने निबंधन कार्यालय के दस्तावेज संख्या 10612, दिनांक 6 जून 1986 के आधार पर खुद को जमीन का खरीदार बताया। विजय कुमार का दावा है कि जांच में यह दस्तावेज संख्या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज मिली, जिससे फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है।
बेलसंड विधायक समेत आठ लोगों पर दर्ज है FIR
कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर पहले जमीन का दाखिल-खारिज कराया गया। इसके बाद जमीन को अभिनव कुमार, अरविंद कुमार मेहता और तुषार सिंह के नाम दर्ज कराने और फिर से दाखिल-खारिज कराने का आरोप है। इस गंभीर मामले में बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू, उनके भाई अभिनव कुमार, तत्कालीन सीओ महेंद्र शुक्ला, राजस्व अधिकारी करुण कुमार और अंचल के कर्मचारियों समेत आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत में स्पष्ट आरोप है कि जमीन के कागजात और दाखिल-खारिज की पूरी प्रक्रिया में मिलीभगत की गई है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों से ही होगी।
पहले भी निलंबित हो चुके हैं महेंद्र शुक्ला
महेंद्र शुक्ला पर यह पहला आरोप नहीं है। उन्हें एक अन्य दाखिल-खारिज मामले में भी निलंबित किया जा चुका है। उन पर मृत महिला मालती देवी के नाम से दर्ज आपत्ति स्वीकार करने और आवेदन को 140 दिनों तक लंबित रखने का आरोप लगा था। जिलाधिकारी कुमार गौरव की जांच रिपोर्ट के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय सारण प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है।
पुलिस जांच में दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर जोर
जमीन विवाद में फर्जी केवाला, दाखिल-खारिज, ऑनलाइन परिमार्जन प्लस और भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र (एलपीसी) से संबंधित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस जांच में दस्तावेजों की प्रामाणिकता, राजस्व रिकॉर्ड में हुए बदलाव और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, निलंबित Musahari CO से पूछताछ जारी है, लेकिन पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। इस कार्रवाई और पूछताछ के संभावित नतीजों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।







