Bihar RPF: पश्चिम रेलवे की आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) टीमों ने ट्रेनों के लगेज डिब्बों को निशाना बनाने वाले एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस हाई-टेक चोर गैंग के सरगना सहित तीन सदस्यों को उत्तर प्रदेश और बिहार से गिरफ्तार किया गया है। इन शातिर चोरों के कब्जे से ट्रेनों से चुराए गए लाखों रुपये मूल्य के रेडीमेड गारमेंट्स और आर्टिफिशियल ज्वेलरी बरामद हुई है।
रेलवे कर्मचारी बनकर करते थे चोरी, कटर से काट देते थे कोच
गिरोह के काम करने का तरीका सुनकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। चोरों की यह गैंग बाकायदा रेलवे मेंटेनेंस विभाग की ड्रेस पहनकर दिव्यांग कोच या एसएलआर (SLR) डिब्बों में दाखिल होती थी। वे अपने साथ इलेक्ट्रिक कटर रखते थे। यात्रा के दौरान ही ट्रेन के अंदर लोहे की चादर और प्लाईवुड की दीवार काटकर पार्सल कोच में घुस जाते थे। सहयात्रियों को लगता था कि रेलवे कर्मचारी मेंटेनेंस का काम कर रहे हैं, जबकि वे चोरी की वारदात को अंजाम देकर बीच रास्ते में ही उतर जाते थे।
गिरोह के काम करने का तरीका सुनकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। वे रेलवे मेंटेनेंस विभाग की ड्रेस पहनकर कोच काटते थे।
इस गिरोह का खुलासा तब हुआ जब 19 सितंबर को ट्रेन संख्या 15569 (अहमदाबाद-दरभंगा अंत्योदय एक्सप्रेस) के एसएलआर कोच को कटर से काटकर आर्टिफिशियल ज्वेलरी के पार्सल चोरी होने की शिकायत दर्ज हुई। इसके साथ ही मुंबई मंडल की एक ट्रेन से भी भारी मात्रा में लेडीज रेडीमेड गारमेंट्स चोरी होने की जानकारी सामने आई।
बिहार और यूपी से दबोचे गए मुख्य आरोपी
पश्चिम रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष जॉइंट टीम का गठन किया गया, जिसमें आरपीएफ क्राइम ब्रांच सूरत के निरीक्षक अशोक कुमार, आरपीएफ उज्जैन के निरीक्षक नरेंद्र यादव और अमलनेर के निरीक्षक सत्यजीत शामिल थे। तकनीकी साक्ष्यों और सूचना तंत्र के आधार पर आरपीएफ टीम ने उत्तर प्रदेश और बिहार में ताबड़तोड़ छापेमारी की।
इस कार्रवाई में गिरोह के मास्टरमाइंड अनिल पटेल को वाराणसी (उत्तर प्रदेश) से गिरफ्तार किया गया। वहीं, मुख्य सरगना के दो सक्रिय सहयोगी मोहम्मद जाहिद और मोहम्मद विक्की को मुंगेर (बिहार) से दबोचा गया। अनिल पटेल के वाराणसी स्थित गोदाम पर छापा मारकर आरपीएफ ने रेलवे से चोरी किए गए 5.60 लाख से अधिक मूल्य के रेडीमेड लेडीज गारमेंट्स और 1.50 लाख मूल्य की आर्टिफिशियल ज्वेलरी बरामद की है।
दो अन्य सदस्यों की तलाश जारी, RPF टीम की भूमिका सराहनीय
इस गैंग के दो अन्य सदस्य अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए आरपीएफ की टीमें अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही हैं। इस बड़े अंतरराज्यीय गिरोह को पकड़ने और घटना का सफल पर्दाफाश करने में आरपीएफ के उप निरीक्षक यशपाल सिंह, सहायक उप निरीक्षक साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक कमल सिंह और प्रधान आरक्षक राजाराम यादव की अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही है। रेलवे सुरक्षा बल की यह कार्रवाई ट्रेनों में यात्रियों और सामान की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा भरोसा पैदा करती है।







