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बिहार के विश्वविद्यालयों में अब नया अध्याय, वेदों और पुराणों समेत कई प्राचीन ग्रंथों की होगी पढ़ाई, 4 वर्षीय स्नातक कोर्स में जुड़ा नया सिलेबस

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वेद-पुराण और वसुधैव कुटुंबकम यह है अब बिहार विश्वविद्यालय का नया पाठ्यक्रम। इसकी पाठ पढ़ेंगे अब बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र। विश्वविद्यालयों में नया सिलेबस जोड़ा गया है। राजभवन की तरफ से जारी सिलेबस में विषय के लिए क्रेडिट और कक्षाओं की संख्या भी तय कर दी गई है।

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हर विषय के लिए अलग-अलग कक्षाएं रखी गई हैं। इसके अलावा कौन सा अध्याय कितने नंबर का है, यह भी तय किया गया है। बिहार में जब से  में अब यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं को वेद-पुराण, भारतवर्ष की अवधारणा और कुटुंबकम का पाठ पढ़ाया जाएगा।

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जानकारी के अनुसार, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय समेत सभी विश्वविद्यालयों में स्नातक में नए सत्र में नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चार साल के कोर्स को लेकर छात्रों को दुविधा हो रही थी, अब राजभवन ने स्पष्ट कर दिया कि चार साल का पाठ्यक्रम या आठ सेमेस्टर पढ़ना अनिवार्य नहीं है।

नई व्यवस्था के तहत सीबीसीएस लागू होने के बाद स्नातक का पाठ्यक्रम चार साल का हो जाएगा। इसमें आठ सेमेस्टर होंगे। राजभवन ने विद्यार्थियों के बीच उत्पन्न हुई दुविधा को दूर करते हुए स्पष्ट किया है कि पहले की तरह तीन साल की पढ़ाई यानि छह सेमेस्टर पूर्ण करने पर उन्हें स्नातक की उपाधि दे दी जाएगी। वैसे विद्यार्थी जो 7.5 या उससे अधिक सीजीपीए लाते हैं और चौथे साल की पढ़ाई के लिए इच्छुक होंगे, उनके लिए चतुर्थ वर्ष अर्थात आठ सेमेस्टर का विकल्प खुला रहेगा।

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इधर, राजभवन की तरफ से राज्य के अलग-अलग विश्वविद्यालयों को को भेजे गए नए चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में नई चीजें शामिल की गई हैं। इसके बाद इतिहास से स्नातक करने वालों को वेद, पुराण, स्मृतियां आदि के बारे में भी पढ़ना होगा।

बिहार के विश्वविद्यालयों में स्नातक कोर्स में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिससे छात्रों को रोजगार के ज्यादा अवसर मुहैया हो पाएं। एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में जाने पर छात्रों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम और सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है।

राजभवन की ओर से फिलहाल दो सेमेस्टर का सिलेबस जारी किया गया है। राजभवन द्वारा भेजे गए सिलेबस में इतिहास के छात्रों के लिए टाइम और स्पेस (दिक्-काल) की भारतीय अवधारणा, ब्राह्मी, खरोष्ठि, पाली और अवहट्ट लिपि का विकास, भारतीय भाषाओं और बोलियों का विकास जैसे विषय भी पढ़ाए जाने की बातें कही गई है। वहीं, राजनीति विज्ञान में छात्रों को वैश्विक राजनीति के बारे में पढ़ाया जाएगा।

वहीं, राजभवन की तरफ से जारी सिलेबस में विषय के लिए क्रेडिट और कक्षाओं की संख्या भी तय कर दी गई है। हर विषय के लिए अलग-अलग कक्षाएं रखी गई हैं। इसके अलावा कौन सा अध्याय कितने नंबर का है, यह भी तय किया गया है। परीक्षा में उस विषय में कितने सवाल पूछे जाएंगे इसका जिक्र भी सिलेबस में कर दिया गया है।

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हिंदी में छात्रों को लोक साहित्य और प्रयोजनमूलक हिन्दी पढ़ाई जाएगी। दर्शनशास्त्र में समकालीन भारतीय दर्शन के बारे में अध्याय होंगे। नए सिलेबस के साथ इसके संदर्भ पुस्तकों का भी उल्लेख किया गया है।

इसके आलावा चार वर्षीय स्नातक कोर्स में चौथे साल में छात्रों को रिसर्च मेथोडोलॉजी की पढ़ाई करनी होगी। नए सिलेबस में रिसर्च मेथोडोलॉजी का भी ब्योरा दिया गया है। हालांकि, राज्य में अधिकतर विश्वविद्यालयों में रिसर्च के तौर-तरीके पढ़ाने के संसाधन नहीं हैं। ऐसे में पहले इन संसाधनों की पूर्ति की जाएगी।

इसके साथ ही सिलेबस में किस विषय के साथ कौन सा स्किल एन्हांसमेंट कोर्स छात्रों को पढ़ना होगा, इसकी सूची भी जारी की गई है। स्किल एन्हांसमेंट कोर्स कितने नंबर और कितने क्रेडिट के होंगे इसकी भी जानकारी नए सिलेबस में दी गई है।

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