UPSC Result: भारत की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है। इस परीक्षा में सफलता पाने वाले हर अभ्यर्थी की कहानी प्रेरणा से भरी होती है। ऐसी ही एक कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की, जिन्होंने डॉक्टर बनने का सपना छोड़कर देश सेवा का मार्ग चुना और अपने दृढ़ संकल्प से यूपीएससी में शानदार सफलता हासिल की।
यूपीएससी रिजल्ट 2022: मेडिकल की पढ़ाई छोड़, नाइट ड्यूटी के साथ ऐसे बनीं अंजलि गर्ग IAS
यूपीएससी रिजल्ट: अंजलि गर्ग की प्रेरणादायक यात्रा
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। इस परीक्षा को पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक दिन-रात मेहनत करते हैं। इसका आकर्षण इतना गहरा है कि लोग लाखों की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर भी इस रास्ते को चुन लेते हैं। लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि हिम्मत, संघर्ष और आत्मबल की मिसाल बन जाती हैं। ऐसी ही कहानी है आईएएस अंजलि गर्ग की।
अंजलि गर्ग का जन्म 14 सितंबर 1996 को चंडीगढ़ में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना डॉक्टर बनने का था। पढ़ाई में वह शुरू से ही तेज थीं और हर परीक्षा को पूरी लगन से देती थीं। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने साबित कर दिया था कि मेहनत और अनुशासन उनके स्वभाव का हिस्सा है। 12वीं कक्षा में अंजलि ने 96 प्रतिशत अंक हासिल किए। यह सफलता उनके आत्मविश्वास को और मजबूत करने वाली थी। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह नीट परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। कठिन मेहनत रंग लाई और उन्होंने नीट परीक्षा पास कर ली।
नीट पास करने के बाद अंजलि को दिल्ली के प्रतिष्ठित VMMC और सफदरजंग अस्पताल में एमबीबीएस करने का मौका मिला। यह उनके जीवन का बड़ा मोड़ था। मेडिकल कॉलेज के शुरुआती साल पढ़ाई और प्रैक्टिकल में निकल गए, लेकिन तीसरे साल में जब उन्होंने जमीनी स्तर पर मरीजों की हालत, सरकारी अस्पतालों की चुनौतियां और सिस्टम की सीमाएं देखीं, तो उनके मन में कई सवाल उठने लगे। यहीं से अंजलि का नजरिया बदलने लगा। उन्होंने महसूस किया कि सिर्फ डॉक्टर बनकर इलाज करना ही काफी नहीं है, बल्कि सिस्टम में बदलाव लाना भी जरूरी है। यही सोच उन्हें यूपीएससी की ओर ले गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
चुनौतियों भरा था सिविल सेवा का सफर
एमबीबीएस के दौरान ही अंजलि ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था। एक ओर मेडिकल इंटर्नशिप, दूसरी ओर सिविल सेवा की तैयारी। अस्पताल में 12 घंटे की नाइट ड्यूटी, थकान, नींद की कमी और फिर भी किताबों के साथ बैठना यह सब किसी परीक्षा से कम नहीं था। कई बार ऐसा हुआ जब शरीर साथ नहीं देता था, लेकिन मन हार मानने को तैयार नहीं था। अंजलि दिन में मरीजों की देखभाल करतीं और रात में अपने सपनों की तैयारी। उन्होंने समय का बेहद सही इस्तेमाल किया और हर खाली पल को पढ़ाई में लगाया। अंजलि ने अपनी पढ़ाई के लिए एक ठोस प्रिपरेशन स्ट्रेटेजी अपनाई, जिसमें निरंतरता और स्मार्ट वर्क शामिल था।
यूपीएससी की तैयारी करते हुए अंजलि ने पहला प्रयास दिया, लेकिन वह सफल नहीं हो पाईं। यह पल उनके लिए बेहद कठिन था। इतनी मेहनत के बाद असफलता मिलना किसी को भी तोड़ सकता है। लेकिन अंजलि ने हार मानने की बजाय खुद को और मजबूत किया और अपनी कमियों पर काम किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
दूसरी कोशिश में अंजलि गर्ग ने वह कर दिखाया, जिसका उन्होंने सपना देखा था। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 79वीं रैंक हासिल की और आईएएस अधिकारी बन गईं। खास बात यह रही कि वह अपने बैच की मेडिकल साइंस टॉपर भी रहीं। उनकी यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो जीवन में चुनौतियों से घबराकर हार मान लेते हैं। लेटेस्ट एजुकेशन और जॉब अपडेट्स के लिए यहां क्लिक करें। अंजलि गर्ग ने साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों और सही प्रिपरेशन स्ट्रेटेजी हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







