Bihar MLC Election: बिहार की राजनीति में बाहुबल और सियासी समीकरणों की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। पटना स्नातक विधान परिषद सीट का चुनाव इस बार इसका केंद्र बन गया है। यहां मुकाबला केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि उनके समर्थन में उतरे प्रभावशाली चेहरों के कारण भी दिलचस्प हो गया है। जदयू विधायक अनंत सिंह जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के लिए खुलकर वोट मांग रहे हैं, जबकि अखिलेश सिंह जदयू के नीरज कुमार के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, अशोक महतो राजद उम्मीदवार के समर्थन में मतदाताओं से अपील कर रहे हैं।
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है। ऐसे में पटना स्नातक सीट पर इन तीनों नेताओं की सक्रियता ने चुनावी चर्चा को और तेज कर दिया है।
अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ खोला मोर्चा
मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह इस चुनाव में अपनी ही पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के डॉ. अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने अनुज सिंह के लिए खुलकर प्रचार किया है और नीरज कुमार को हराने की बात भी कही है। यह स्थिति जदयू के लिए असहज पैदा करती है, क्योंकि नीरज कुमार पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता हैं। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पुरानी राजनीतिक खींचतान भी रही है। अनंत सिंह का अनुज सिंह के पक्ष में उतरना इस सीट पर कड़ा मुकाबला बनाता दिख रहा है। मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा कि उनका यह समर्थन कितना असरदार साबित होगा।
नीरज कुमार के लिए प्रचार में अखिलेश सिंह
दूसरी तरफ, अखिलेश सिंह जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। वह नवादा के वारिसलीगंज की पूर्व विधायक अरुणा देवी के पति हैं। नीरज कुमार के नामांकन के दौरान भी अखिलेश सिंह उनके साथ नजर आए थे। अब वह चुनाव क्षेत्र में मतदाताओं से समर्थन जुटाने में सक्रिय हैं। अखिलेश सिंह की पहचान नवादा और आसपास के इलाकों में प्रभावशाली राजनीतिक-सामाजिक पकड़ रखने वाले व्यक्ति के रूप में रही है। उनकी पत्नी अरुणा देवी वारिसलीगंज से चार बार विधायक रह चुकी हैं। हालांकि, 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अखिलेश सिंह का नीरज कुमार के पक्ष में प्रचार करना इस चुनाव में एक अहम समीकरण है। एक तरफ अनंत सिंह जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार के विरोध में हैं, तो दूसरी तरफ अखिलेश सिंह उसी उम्मीदवार के समर्थन में मैदान में हैं।
राजद उम्मीदवार के समर्थन में अशोक महतो
इस चुनाव में तीसरा चर्चित नाम अशोक महतो का है। वारिसलीगंज की वर्तमान राजद विधायक अनीता देवी के पति अशोक महतो राजद उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। वह उम्मीदवार के साथ चुनाव क्षेत्र में जा रहे हैं और बैठकों में भी शामिल हो रहे हैं। अशोक महतो का राजद नेतृत्व से करीबी संबंध रहा है। उनकी पत्नी अनीता देवी भी राजद की विधायक हैं। अशोक महतो की सक्रियता से चुनाव में राजद के उम्मीदवार को स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस तरह, पटना स्नातक सीट पर तीन प्रभावशाली चेहरे अलग-अलग उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटा रहे हैं। अनंत सिंह जन सुराज के साथ हैं, अखिलेश सिंह जदयू उम्मीदवार के पक्ष में हैं और अशोक महतो राजद के उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।
अखिलेश सिंह और अशोक महतो की पुरानी अदावत फिर चर्चा में
अखिलेश सिंह और अशोक महतो के बीच पुरानी प्रतिद्वंद्विता भी इस चुनाव के संदर्भ में चर्चा में है। नवादा, नालंदा और शेखपुरा के कुछ इलाकों में दोनों पक्षों के बीच वर्चस्व की लड़ाई की खबरें 1998 से 2006 के बीच हिंसक घटनाओं और जातीय तनाव के साथ सामने आई थीं। यह राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता वारिसलीगंज की राजनीति से भी जुड़ी है। 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद ने अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी को उम्मीदवार बनाया था, जिसमें अनीता देवी ने जीत दर्ज की थी और अरुणा देवी को हार का सामना करना पड़ा था। अशोक महतो खुद चुनाव नहीं लड़ सके हैं, क्योंकि उनके आपराधिक मामलों और सजा से जुड़ी कानूनी स्थिति के कारण उनकी चुनावी भूमिका सीधे उम्मीदवार के रूप में नहीं रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उनकी पत्नी अनीता देवी को राजद ने मुंगेर सीट से मैदान में उतारा था, जहां उनका मुकाबला जदयू के ललन सिंह से था।
क्या बदलेंगे चुनावी समीकरण?
पटना स्नातक सीट पर इन नेताओं की सक्रियता से चुनाव को लेकर राजनीतिक दिलचस्पी काफी बढ़ी है। हालांकि, किसी प्रभावशाली नेता के प्रचार में उतरने भर से जीत या हार तय नहीं होती। इस सीट पर पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करेंगे। उम्मीदवारों के मुद्दे, मतदाताओं तक उनकी पहुंच और समर्थन जुटाने की क्षमता भी अहम होगी। फिलहाल, यह चुनाव जदयू के भीतर मतभेद, जन सुराज की चुनौती और राजद की अपनी रणनीति के कारण चर्चा में है। 23 अक्टूबर को होने वाला मतदान बताएगा कि इन तीनों नेताओं का समर्थन किस उम्मीदवार के पक्ष में कितना असर डाल पाया।







