Bihar Sanskrit Education: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में एक बड़े बदलाव की नींव रखी गई है। विश्वविद्यालय ने द्विवर्षीय और एक वर्षीय (दो सेमेस्टर) आचार्य पाठ्यक्रम के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसका उद्देश्य संस्कृत शिक्षा को आधुनिक आवश्यकताओं और रोजगारपरक दृष्टिकोण से जोड़ना है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए विश्वविद्यालय मुख्यालय में सोमवार से तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जो 23 से 25 जून तक चलेगी।
रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर जोर: पाठ्यक्रम में क्या-क्या होगा शामिल?
इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य यूजीसी के नए मानदंडों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप आचार्य पाठ्यक्रम का प्रारूप तैयार करना है। विषय विशेषज्ञ समितियां, जिनमें विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों और विभिन्न महाविद्यालयों के अनुभवी प्राध्यापक शामिल हैं, इस कार्य में जुटी हैं। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि संस्कृत शिक्षा को केवल पारंपरिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे आधुनिक आवश्यकताओं और रोजगारोन्मुखी दृष्टिकोण से भी जोड़ा जाना चाहिए।






पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा, मूल्य वर्धित पाठ्यक्रम, योग्यता संवर्धन पाठ्यक्रम, कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा योग्यता रूपरेखा सहित अन्य समकालीन विषयों को समाहित करने पर विचार-विमर्श किया गया। इसका मकसद विद्यार्थियों को शास्त्रीय ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाना है।
कुलपति ने बताया संस्कृत का महत्व और नया दृष्टिकोण
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन करते हुए अपने संबोधन में कहा, ‘संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार और ज्ञान सूत्र है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति का प्रमुख माध्यम संस्कृत रही है। भाषा और साहित्य दोनों ही ज्ञान सूत्र से जुड़े हुए हैं तथा संस्कृत के माध्यम से भारतीय सभ्यता की महान परंपराओं को समझा जा सकता है।’ उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान और भारतीय ज्ञान प्रणाली के समन्वय पर बल देती है।
पीआरओ डॉ. निशिकांत ने बताया कि इस कार्यशाला में उपस्थित विभागाध्यक्षों एवं विषय विशेषज्ञों ने पाठ्यक्रम को छात्र-केंद्रित, रोजगारोन्मुखी और अनुसंधानपरक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। कार्यशाला का संयोजन डीएसडब्ल्यू प्रो. पुरेंद्र वारिक कर रहे हैं, जबकि विशेष कार्य पदाधिकारी (शैक्षणिक) को सह-संयोजक और डॉ. छबिलाल न्यौपाने को तकनीकी सहायक का दायित्व सौंपा गया है। इस दौरान कुलसचिव डॉ. दिनेश झा भी उपस्थित थे।
इन विशेषज्ञों की टीम कर रही है पाठ्यक्रम तैयार
पाठ्यक्रम निर्माण के लिए विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को मनोनीत किया गया है:
| विशेषज्ञ का नाम | पद/विभाग | संस्थान |
|---|---|---|
| प्रो० दिलीप कुमार झा | धर्मशास्त्र विभागाध्यक्ष | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| प्रो० पुरेन्द्र वारिक | प्राचार्य (धर्मशास्त्र) | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ ० सन्तोष कुमार तिवारी | सहायक-प्राचार्य (धर्मशास्त्र) | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० सुचिस्मिता पाणिग्राही | सहायक-प्राचार्य (धर्मशास्त्र) | धर्म समाज संस्कृत महाविद्यालय, मुजफ्फरपुर |
| डॉ० ध्रुव मिश्र | वेद विभागाध्यक्ष | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० श्याम सुन्दर ठाकुर | सहायक-प्राचार्य (वेद) | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० चन्द्रेश उपाध्याय | सहायक-प्राचार्य (वेद) | शिव प्रसाद संस्कृत डिग्री कॉलेज, बक्सर |
| डॉ० सीताचरण झा | व्याकरण विभागाध्यक्ष | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| प्रो० दयानाथ झा | प्राचार्य (व्याकरण) | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० यदुवीर स्वरूप शास्त्री | सहायक-प्राचार्य (व्याकरण) | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० राम निहोरा राय | ज्यौतिष विभागाध्यक्ष | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० शिवलोचन झा | प्रधानाचार्य एवं ज्यौतिष सङ्कायाध्यक्ष | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० कुणाल कुमार झा | उपाचार्य (ज्यौतिष) एवं कुलानुशासक | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० वरुण कुमार झा | सहायक-प्राचार्य (ज्यौतिष) | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० सन्तोष पासवान | सहायक-प्राचार्य एवं साहित्य विभागाध्यक्ष | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० सुधीर कुमार | सहायक-प्राचार्य (साहित्य) | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० प्रमोद कुमार मिश्र | सहायक-प्राचार्य (साहित्य) | म.अ.रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय, दरभंगा |
| डॉ० धीरज कुमार पाण्डेय | दर्शन विभागाध्यक्ष | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० छबिलाल न्यौपाने | सहायक-प्राचार्य (दर्शन) | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| डॉ० शशिकान्त तिवारी | सहायक-प्राचार्य (दर्शन) | राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, पटना |
यह विशेषज्ञ टीम सुनिश्चित करेगी कि नया पाठ्यक्रम छात्रों के लिए प्रासंगिक और लाभकारी हो।
तीन दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला के उपरांत तैयार प्रारूप को विश्वविद्यालय की विभिन्न प्राधिकारों से स्वीकृति के बाद शैक्षणिक परिषद एवं लोक भवन के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। यह पहल बिहार में संस्कृत शिक्षा के भविष्य को नया आयाम देने में महत्वपूर्ण साबित होगी।








