Bihar Sugar Mills: मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में पाइप नेचुरल गैस (PNG) परियोजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में PNG परियोजनाओं के विस्तार, बेहतर समन्वय एवं समयबद्ध कार्यान्वयन से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
वहीं गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बिहार में चीनी उद्योग को नई रफ्तार देने और नई मिलों की स्थापना के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हाल ही में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समिति की बैठक में गन्ना उद्योग से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। इस बैठक में मार्च 2027 तक नवादा, मुजफ्फरपुर के मोतीपुर और गोपालगंज के सासामूसा में तीन नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है।

इन नई परियोजनाओं के साथ राज्य में चीनी मिलों की स्थापना के लिए अन्य संभावित स्थानों, जमीन की उपलब्धता और निवेश से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने पिछली बैठकों में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की अद्यतन स्थिति और नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी।
गन्ना किसानों की समस्याओं का होगा समाधान
बैठक में गन्ना उत्पादक जिलों में जलजमाव की गंभीर समस्या पर भी ध्यान दिया गया। इसके स्थायी समाधान के लिए जल संसाधन विभाग को बड़े स्तर पर परियोजना का विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम गन्ना उत्पादन को बढ़ाने और किसानों की परेशानियों को कम करने में सहायक होगा।
इसके साथ ही, कृषि विभाग को बिहार में नीलगाय की समस्या से निपटने के लिए नई तकनीकों पर आधारित प्रस्ताव तैयार करके केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया। यह दोनों पहल गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आएंगी।
लौरिया, सुगौली समेत अन्य स्थानों पर भी फोकस
राज्य में सिर्फ तीन नई मिलों तक ही बात नहीं रुकी है। लौरिया और सुगौली चीनी मिलों में प्रस्तावित परियोजनाओं की स्थापना को लेकर एचपीसीएल बायोफ्यूल्स लिमिटेड के साथ मुख्य सचिव स्तर पर एक बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है। वहीं, मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम में भी Bihar Sugar Mills की स्थापना पर जोर दिया जा रहा है।
सकरी और रैयाम के लिए इंडियन पोटाश लिमिटेड, गन्ना उद्योग विभाग और सहकारिता विभाग को मिलकर नई दिल्ली में केंद्रीय सहकारिता मंत्री, मुख्यमंत्री बिहार और केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष प्रस्ताव रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, सकरी और रैयाम में चीनी मिल के लिए जमीन हस्तांतरण से संबंधित बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) (संशोधन) विधेयक की स्वीकृति के संबंध में मुख्य सचिव स्तर से महाधिवक्ता से परामर्श लेने को कहा गया है।
जमीन अधिग्रहण और निवेश नीति में बदलाव
नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए जमीन की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण पहलू है। मोतिहारी, सारण और भागलपुर के जिलाधिकारियों को जमीन की उपलब्धता के संबंध में मुख्य सचिव स्तर से पत्र भेजने का निर्णय लिया गया है। बेगूसराय और पूर्णिया जिलों में प्राथमिकता के आधार पर उद्योग विभाग के साथ समन्वय करके चीनी मिल स्थापना के लिए उपयुक्त जमीन चिन्हित करने का निर्देश भी दिया गया है।
चकिया (पूर्वी चंपारण) और वारिसलीगंज (नवादा) में प्रस्तावित जमीन का तकनीकी मूल्यांकन और रिपोर्ट राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ लिमिटेड, नई दिल्ली के माध्यम से तैयार कराने का निर्देश है। मुजफ्फरपुर के मोतीपुर चीनी मिल की जमीन वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए वित्त विभाग से प्राप्त राशि को इंडियन पोटाश लिमिटेड को नियमानुसार हस्तांतरित करने का निर्देश गन्ना उद्योग विभाग को दिया गया। सासामूसा चीनी मिल की स्थापना के मामले में न्यायालय से प्राप्त आदेश के बाद निवेशक के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई करने और हथुआ राज की जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
‘जमीन की उपलब्धता और परियोजना मूल्यांकन के दौरान बिहार के निवेशकों को पांच अंक का अतिरिक्त वेटेज देने का प्रावधान किया जा सकता है।’
वर्द्धन सीबीजी के प्रबंध निदेशक अमित कुमार सिंह ने बिहार के निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए यह सुझाव दिया। बैठक में बिहार गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 की मार्गदर्शिका में भी सुधार करने का निर्देश दिया गया, जिसमें जमीन की उपलब्धता और परियोजना मूल्यांकन से संबंधित प्रावधानों में बदलाव के साथ परियोजनाओं के लिए कमिटेड अप्रूवल की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। यह सभी पहल राज्य में चीनी उद्योग के विकास को गति देंगी और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेंगी।







